6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शारदीय नवरात्र पर्व 15 से, देवी के स्वागत की तैयारी, मंदिरों में सजावट की जा रही

Sharadiya Navratri festival In Rajnandgaon: शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी। इसे लेकर तैयारी तेज हो गई है।

2 min read
Google source verification
Shardiya Navratri festival from 15th Rajnandgaon News

शारदीय नवरात्र पर्व

राजनांदगांव। Sharadiya Navratri festival 2023: शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी। इसे लेकर तैयारी तेज हो गई है। मूर्तिकार जहां माता की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, तो वहीं इधर शहर से लेकर गांवों में माता के स्वागत को लेकर उत्साह का माहौल है। शीतला मंदिर, देवालयों और माता आदि शक्ति के बड़े मंदिरों में साफ-सफाई और लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। माता की प्रतिमा स्थापना के लिए पंडाल भी सजने लगे हैं।

पर्व में नौ दिनों तक आदि शक्ति माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। माता मंदिरों में ज्योत जंवारा और मनोकामना ज्योति कलशों की स्थापना की जाती है। शहर के शीतला मंदिर, मां पाताल भैरवी मंदिर और डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में बड़ी संख्या में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाते हैं। प्रदेश के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना ज्योति कलश स्थापित करवाए जाते हैं।

यह भी पढ़े: सात दिन में जमा कराना होगा पुलिस थानों में लाइसेंसी हथियार

पैदल मार्ग पर लगेगा सेवा पंडाल

पैदल यात्री अंजोरा बाइपास से दायीं ओर चलते हुए राम दरबार मंदिर तक पहुंचेंगे। यहां से सर्विस रोड पकड़कर पुराना बस स्टैंड चौक से वेसलियन स्कूल वाली गली से सीधे बल्देवबाग होते हुए बीएनसी मिल वाले मार्ग से अंडरब्रिज क्रास कर मोतीपुर डोंगरगढ़ पहुंच मार्ग पहुंचेंगे। इन रास्तों पर प्रशासन, समाजसेवी और उद्योगपतियों द्वारा जगह-जगह सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। पंडाल में पदयात्रियों के लिए स्वलपाहार से लेकर ठहरने आराम करने और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था होगी।

इसलिए व्यवस्था की जाएगी

शारदीय नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए डोंगरगढ़ और करेला भवानी मंदिर पहुंचते हैं। रायपुर की ओर से आने वाले पैदल यात्रियों के लिए अंजोरा बाइपास से हाइवे को वनवे किया जाता है। एक ओर पैदल यात्रियों का जत्था चलता है, तो दूसरी ओर ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाता है, ताकि पदयात्रियों को कोई दिक्कत न हो।

यह भी पढ़े: साढ़े पांच साल में 2266 कोल कर्मियों की 60 वर्ष से पूर्व हो गई असामयिक मौत