
महिलाएं करती रही विनती, मगर परिचय लेकर चलीं गई आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी
राजसमंद. राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी मंगलवार को राजसमंद पहुंचीं और बालिका गृह में बच्चियों से रूबरू हुईं। इससे पहले अभिभावकों से मिलकर उनसे परिचय किया, मगर जैसे ही महिलाएं एक के बाद एक सवाल करने लगीं, आयोग अध्यक्ष बिना जवाब दिए ही चलती बनी। परिजन बोले कि एक तरफ बच्चियों की सुरक्षा, सुविधा की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ बाल पकडक़र, घसीटकर व मारपीट करते हुए बच्चियों से बाल कल्याण समिति व पुलिस द्वारा ज्यादती कर रही है। इस बात पर अध्यक्ष सिर्फ इतना सा बोलीं कि इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई संभव है। फिलहाल सभी बच्चियों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखकर बच्चियों को सरकारी भवन में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। इससे पहले आयोग अध्यक्ष ने पुलिस, प्रशासन व बाल कल्याण समिति की आपात बैठक लेकर 6 7 बालिकाओं को रेस्क्यू करने की कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट ली। साथ ही स्पष्ट किया कि अब सभी बच्चियों को संबंधित राज्य व जिला बाल कल्याण समितियों के माध्यम से परिजनों को सौंपा जाएगा।
बचपन नहीं छिनने देंगे
आयोग अध्यक्ष चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों का बचपन खत्म हो रहा है। मैं धर्म को गलत नहीं कहती, मगर धर्म के नाम पर मासूमों से ज्यादती भी सहन नहीं करेंगे। अगर धार्मिक संस्था रजिस्टर्ड नहीं हो और किसी को कुछ भी करने की छूट कैसे दी जाए? बच्चियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है और उन्हें परामर्श भी दिया जा रहा है।
मीडिया के सवालों पर भी टालमटोल
सवाल : आध्यात्मिक स्कूल में क्या बच्चों को आध्यात्मिक शिक्षा देना गलत है?
जवाब : आध्यात्मिक संस्थाओं में इस तरह से रखना भी ठीक नहीं है, जैसा मैंने सुना यह सही नहीं है। ऐसी स्थिति में बाल कल्याण समिति निर्णय लेकर कार्रवाई कर सकती है। बच्चे हैं, इसलिए सोचना जरूरी है। पंजीयन तो सब करवा सकते हैं, बिना पंजीयन के भी रखते हैं, पर देखना है कि बच्चों का बेहतर भविष्य है या नहीं।
सवाल : क्या अब तक समिति व आयोग दस्तावेज नहीं देख पाई?
जवाब : दोनों पक्षों की बात पूरी जानकर पांच दिन में नतीजा नहीं निकाला जा सकता। हड़बड़ी में हमेशा गलतियां होती हैं।
सवाल : अब बच्चियों को उनके माता-पिता को सौंपने में कितना वक्त लगेगा?
जवाब : जितना जरूरी है, उतना ही समय लगेगा। अनावश्यक समय जाया नहीं होने दिया जाएगा।
सवाल : क्या धार्मिक संस्था का पंजीयन जरूरी है?
जवाब : अगर छोटे बच्चे रखे हैं, तो जेजे एक्ट में उसका पंजीयन जरूरी है। मंदिरों का भी पंजीयन होता है।
Published on:
11 Jul 2018 08:57 am
