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Teacher Day: ऐसा ​शिक्षक जो हर साल करवाता है कोचिंग में निशुल्क तैयारी

राउमावि टांटोल में पदस्थापित तृतीय श्रेणी (लेवल-1) शिक्षक लोकेश सोनी शिक्षकों का समूह बनाकर विद्यार्थियों को मुफ्त में कोचिंग देकर कॅरिअर बनाने में मदद कर रहे हैं

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Teacher Lokesh

Teacher Lokesh

गिरिश पालीवाल

खमनोर. राउमावि टांटोल में पदस्थापित तृतीय श्रेणी (लेवल-1) शिक्षक लोकेश सोनी शिक्षकों का समूह बनाकर विद्यार्थियों को मुफ्त में कोचिंग देकर कॅरिअर बनाने में मदद कर रहे हैं। शारीरिक रूप से 75 फीसदी दिव्यांग शिक्षक लोकेश ने 2007 में शिक्षक की नौकरी हासिल की। वे खुद 11 विषयों में एमए कर चुके हैं। उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होने का विद्यार्थियों का दर्द समझा। इसको लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग शुरू की। अभिभावकों की कमजोर आर्थिक स्थिति, बालिकाओं को कोचिंग के लिए दूरस्थ भेजने में असहमति को पीछे छोड़ पाठ्यक्रम, समय प्रबंधन, काउंसलिंग, कॉलेज एलॉटमेंट पर ज्वाइन, अपवर्ड मूवमेंट, सहित सभी ऑनलाइन कामों में निशुल्क मदद शुरू की। ऑफलाइन कोचिंग के साथ-साथ ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप में स्टडी मटेरियल भेजकर साप्ताहिक टेस्ट से मूल्यांकन, ऑफलाइन कोचिंग में साप्ताहिक ओएमआर आधारित मॉक टेस्ट, तय समय में प्रश्न-पत्र हल से आत्मविश्वास में वृद्धि जैसी उल्लेखनीय गतिविधियां शुरू की। विद्यार्थियों को राजकीय सेवाओं में कॅरिअर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

8 साल से गर्मी की छुट्टियों में रोज 8 घंटे कोचिंग

पिछले 8 वर्षाे से ग्रीष्मकालीन अवकाश में प्रतिदिन 8 घंटे प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं। खासतौर पर प्रीडीएलए की कोचिंग से अभ्यर्थियों की शिक्षक बनाने की राह आसान कर रहे हैं। हर साल 80-85 विद्यार्थी कोचिंग कक्षाओं में आकर तैयारी कर रहे हैं। मुफ्त कोचिंग से हर एक विद्यार्थी का 5 हजार रुपए से अधिक खर्च होने से बच रहा है।

अकेले की शुरुआत, फिर जुड़ता गया कारवां

लोकेश ने 2016 से 2018 तक अकेले ही अपने घर पर बुलाकर विद्यार्थियों को सभी विषयों में कोचिंग करवाई। 2019 में टांटोल स्कूल में शुरू की। बाद में अन्य विषय विशेषज्ञ शिक्षक भी प्रभावित हुए और इस सेवा कार्य से जुड़े। अब हर साल खमनोर मुख्यालय पर महाराणा प्रताप राउमावि में नियमित कोचिंग चलाई जा रही है।

इन गांवों के विद्यार्थी ले रहे लाभ

कोचिंग में खमनोर, सोई की भागल, रूपजी का गुड़ा, उनवास, सेमल, बलीचा, सरसूनिया, भियांज, टांटोल, निचली ओडन, पासुनिया, मोलेला परावल, बागोल, डाबुन, मचींद, कराई, छोटा भाणुजा, बड़ा भाणुजा, खेड़ी, गोलाया, सेमा आदि गांवों के विद्यार्थी पढ़ने आ रहे हैं। इसके अलावा सैंकड़ों विद्यार्थी ऑनलाइन कोचिंग का लाभ ले रहे हैं। लोकेश का कहना है कि उनका लक्ष्य अधिकतम स्थानीय शिक्षक तैयार कर जिले की स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है।