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51 वर्ष बाद विपक्ष में बैठेंगे कुंभलगढ़ के विधायक सुरेन्द्रसिंह राठौड़

1967 से 2018 तक लगातार सत्ता पक्ष में बैठने का रिकॉर्ड अब तक 11 बार सत्ता पक्ष व 4 बार विपक्ष में बैठने का संयोग
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After 51 years, MLA from Kumbhalgarh will sit in the opposition

51 वर्ष बाद विपक्ष में बैठेंगे कुंभलगढ़ के विधायक सुरेन्द्रसिंह राठौड़

आईडाणा. 15 वीं विधानसभा में कुम्भलगढ़ से भाजपा के सुरेन्द्रसिंह राठौड़ के विधायक बनने व प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने से कुम्भलगढ़ विधायक को 51 वर्ष बाद विपक्ष में बैठना पड़ेगा। यह संयोग भी ऐसा बना है कि 15 वीं विधान सभा एवं 51 वर्ष में अंकों का उलटफेर भी हुआ है। अब तक हुए विधानसभा के 15 चुनावों में कुम्भलगढ़ विधायक 11 बार सत्ता पक्ष एवं 4 बार विपक्ष में बैठा। यहां के मतदाताओं का सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव कहें या संयोग, जो भी हो, लेकिन इस सीट पर जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता था, सरकार भी उसी की बनती आई है। अयेज दुर्ग के रूप में ख्याती प्राप्त कुम्भलगढ़ राज्य में सत्ता प्राप्त करने वाली पार्टी के लिए भी विजय की सौगात लेकर आता है। ऐसे में यह धारणा सी बन गई कि विधानसभा में सरकार बनाने का रास्ता कुम्भलगढ़ से होकर जाता है। लेकिन, इस विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं हो पाया। हालांकि सत्ता पक्ष में बैठने का संयोग एक दो बार नहीं, बल्कि 11 बार बन चुका है। लेकिन, लगातार 51 वर्ष के इस संयोग के बाद अब फिर यहां का विधायक विपक्ष में बैठेगा। अब तक यहां से 4 बार भाजपा, 8 बार कांग्रेस तथा एक-एक बार जनसंघ, जनता पार्टी एवं एसडब्ल्यूटी के विधायक चुने गए।

ये बैठे सत्ता पक्ष में
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के हीरालाल देवपुरा 196 7, 1972, 198 0, 198 5, 1990 व 1998 में कांग्रेस के हीरालाल देवपुरा, 1977 में जनता पार्टी के गोविन्दसिंह शक्तावत, भाजपा के सुरेन्द्रसिंह राठौड़ 1993, 2003 व 2013 में तथा कांग्रेस के गणेशसिंह परमार 2008 में विधायक बने। इन सभी को सत्ता पक्ष में बैठने का मौका मिला।

इन्हें नहीं मिला सत्ता पक्ष में बैठने का मौका
1952 में जनसंघ के विजयसिंह, 1957 में कांग्रेस मनोहरलाल कोठारी, 196 2 में एसडब्ल्यूटी के गोविन्दसिंह एवं 2018 में भाजपा के सुरेन्द्रसिंह को सत्ता पक्ष में बैठने का मौका नही मिला।