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भागवत श्रवण से ही मुक्ति संभव-उत्तम स्वामी

भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब
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rajsamand

भागवत श्रवण से ही मुक्ति संभव-उत्तम स्वामी

भीम. मियाला में आयोजित भागवत कथा में दूसरे दिन उत्तम स्वामी ने कहा कि परमार्थ परमात्मा की कृपा से ही सम्भव है। इस भूमि में भागवत रूपी भगवान के आते ही अखण्ड वर्षा प्रारम्भ हो गई। ईश्वर की कृपा से ही अपने पापों को नष्ट करने में भाद्रपद श्रेष्ठ माना गया है। इसी माह में श्रीमदभगवत का पारायण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत ईश्वर को प्राप्त करने का श्रेष्ठ मार्ग है। रामदेव बाबा व धनराज बाबा जिन्हें बुलाएंगे वे ही कथा श्रवण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सभी पुराणों में भागवत सबसे श्रेष्ठ पुराण है। भागवत श्रवण से प्रभु का आशीर्वाद मिलता है। भागवत स्वयं भगवान राम है। संत योगी महात्मा व कठोर तपस्या करने वाले ऋषि मुनि भी भागवत कथा सुनते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत चौबीस अवतारों का प्रतीक है। मनुष्य का जीवन पापों में रत रहता है। पापात्मक कर्मो से मुक्ति पाने एवं मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए भागवत श्रेष्ठ उपाय है। भागवत श्रवण से ही पापों से मुक्ति मिलती है। इस दौरान आयोजक हीरालाल चंदेल, आयोजन समिति अध्यक्ष सरपंच जयेन्द्रसिंह रावत, सरपंच प्यारी कंवर रावत, रामबाबा त्यागी, निखिल त्रिवेदी रजनीश गांधी पुरुषोत्तम, रूपनारायण, रामलाल, प्रभुलाल, लक्ष्मणसिंह, जसवंत सिंह, विजयसिंह, सतवीर सिंह मौजूद थे। संचालन नयनेश जानी ने किया।
सत्व का एक मात्र स्त्रोत गोमाता-पुरोहित
आईडाणा. खाखरमाला में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर आश्रम आड़ावाला में रविवार शाम को श्री गोभक्त सेवा समिति द्वारा ‘गोभक्ति क्या है विषय’ पर गोष्ठी का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता आमेट पंचायत समिति के विकास अधिकारी एवं गोकथा वाचक राकेश पुरोहित ने कहा कि गो भक्ति को हमे समझना होगा, जिस दिन गो भक्ति समझ आ गई उस दिन से एक भी गो दुखी नहीं होगी। पहले मंदिर कम थे, यात्रियों की संख्या कम थी, शास्त्र कम थे फिर भी लोगो में प्रेमभाव था। लेकिन, आज सब कुछ बढ़ा पर प्रेमभाव घट गया। उन्होंने कहा कि भक्ति का उद्भव सत्व के धरातल पर होता है और सत्व का एकमात्र स्त्रोत गोमाता है। सृष्टि पर गो माता के अलावा ऐसा कुछ बना ही नहीं, जहां इंसान प्रेम एवं शांति खोज सकता है। उन्होंने गो सेवा को सर्वोच्च सेवा बताते हुए कहा कि गोमाता स्वयं तय करती है कि उसे किस से सेवा लेनी है। इस दौरान जवानसिंह चुण्डावत, मनोहर सिंह चुण्डावत, गोभक्त सेवा समिति अध्यक्ष धर्मेश छीपा, धेनु गोपाल गोशाला सियाणा व्यवस्थापक धर्मचन्द गुर्जर, बंशीलाल पालीवाल, नन्दकिशोर कंसारा, राउमावि प्रधानाचार्य महावीर प्रसाद बघेरवाल, विद्या निकेतन प्रधानाध्यापक गिरवर सिंह सिसोदिया, बाबूलाल लोढ़ा, नन्दलाल पालीवाल, जेठूसिंह राजपुरोहित सहित गोभक्त मौजूद थे।