भैंसों को रिझाने उमड़ा सैलाब

भैंसों को रिझाने उमड़ा सैलाब

Jitendra Paliwal | Publish: Nov, 10 2018 12:17:48 PM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

चारभुजानाथ को चावल-चंवले का भोग, फिर बंदूक से सलामी

चारभुजा. धर्मनगरी में गुरुवार रात चारभुजा मंदिर प्रांगण में अन्नकूट महोत्सव श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। अन्नकूट देखने दोपहर दो 2 बजे से ही छतों व मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। शाम 4 बजे प्रभु चारभुजानाथ की कसार आरती के बाद देवस्थान विभाग द्वारा पहली तोप दागी गई। इसके साथ ही मंदिर का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया और अन्नकूट महोत्सव में अन्न धराने का सिलसिला शुरू हुआ। मंदिर प्रांगण में केले के पत्तों व आम्र पत्तों से बंदनवार बनाया गया। केले के पत्ते आंगन में बिछाए गए। भक्तों द्वारा देवस्थान कचहरी से छाबड़ों में चावल, चवले सहित अन्न लाने का क्रम शुरू हुआ, एक घण्टे तक चलता रहा। इसमें घी, मावा, मिश्री, मालपुए, लड्डू, बादाम, अखरोट, जलेबी, लापसी, गुड़, शंकर, आगरा के पेठेे सहित छप्पन तरह के व्यंजन धराए गए। 51 क्विंटल चावल व 20 क्विंटल चवले का भोग धराया गया।


इसके बाद ट्रस्टियों व चोवटियों द्वारा अन्नकूट के चारों ओर थालों में सजाकर व्यंजनों का सजाया गया। अन्नकूट के पास गन्ने व कद्दू की सब्जी भी धराई गई। इसके बाद मंदिर के निज गर्भ ग्रह से पुजारी द्वारा चारभुजा जी की बाल प्रतिमा को भोग धराने के लिए लाया गया। भगवान की बाल प्रतिमा को लाते समय ढोल, नगाड़े व शहनाईयों की धुन बजती रही। चांदी की पालकी को अन्नकूट के बीच धराया गया। पहले गाय की बछड़ी को शृंगारित कर पुजारी रमेश त्यागी व रामचन्द्र गुर्जर द्वारा अन्नकूट की परिक्रमा करवाई गई। बाद में बाल प्रतिमा को अन्नकूट की परिक्रमा करवाकर चंादी की पालकी में बिराजित किया गया। भोग रस्म होते ही बाल लला को पुन: गर्भ ग्रह में ले जाया गया। वही ंदेवस्थान विभाग कार्मिकों द्वारा दूसरी बार तोप दागते ही मुख्य दरवाजा खोला गया। दरवाजा खुलते ही भील समुदाय के लोग अंदर आए और अन्नकूट का प्रसाद झोलियों में भरकर ले गए। इस दौरान समाज के लोगों ने मंदिर के अंदर प्रवेश कर ठाकुरती के दर्शन करते हुए उत्सव मनाया।इसी तरह रोकडिय़ा हनुमान मंदिर व सैवन्त्री रूपनारायण मंदिर में भी अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। सैवन्त्री में प्रसाद लूटा गया, जबकि रोकडिय़ा हनुमान मंदिर में भक्तो को भोजन व प्रसाद देकर अन्नकूट महोत्सव मनाया गया।


गिलूंड : भैंसों को रिझाने उमड़ा सैलाब
रेलमगरा. गोवर्धन पूजा के अवसर पर गिलूण्ड के माणक चौक में भैंसों को रिझाने की अनूठी परंपरा का निर्वहन परंपरागत तरीके से किया गया। परंपरानुसार सदर बाजार स्थित माणक चौक में दोपहर 3 बजे ढोल ंनगाड़ा वादन के साथ शुरुआत हुई। यहां एके-47, मशीनगन, तोप, बन्दूक, देशी कट्टा की तर्ज पर हाथों से निर्मित गनों के जरिए की गई आतिशबाजी ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। करीब दो घंटे तक चली आतिशबाजी के बाद रणभेरी के स्वर के साथ भैंसों की पहली जोड़ी को चौक में लाया गया। दर्शकों से खचाखच भरे चौक में भैंसों की इस जोड़ी की पूजा कर पशुपालकों का सम्मान किया गया। वहीं बाद में इस जोड़ी को रिझाने का क्रम शुरू हुआ। इसके बाद एक-एक करके चार चार जोड़ी के भैंसों को चौक में लाया गया। इन सभी की पूजा ाके बाद उन्हें रिझाया गया। इसके बाद एक बार फिर से सामूहिक आतिशबाजी का क्रम शुरू हुआ जो देर शाम तक चला। बाद में माणक चौक में ही स्थित लाल मंदिर के गर्भ गृह में बिराजित मूल प्रतिमा को गर्भ गृह से बाहर लाया गया। यहां ढोल नगाड़ों की थाप के साथ अन्नकूट की परंपरा का निर्वहन किया गया।

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