जिस चाबी से ताला खोला, उसी ने खोल दिया वारदात का राज

भूमि विकास बैंक में छह लाख की चोरी का आरोपी बैंक का चपरासी ही निकला, 15 दिन पहले बनाई थी योजना, कड़ाई से पूछा तो कबूली वारदात, एक कमरे के ताले की चाबी दस दिन पहले रख ली थी खुद के पास

By: jitendra paliwal

Published: 21 Jul 2021, 11:39 AM IST

राजसमंद @ पत्रिका. भूमि विकास बैंक में अलमारी से 5 लाख 95 हजार रुपए की नकदी चोरी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। चपरासी ने ही अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने चोरी हुई राशि भी बरामद कर ली है। पुलिस को बैंक के कर्मचारियों पर शक था।

पुलिस ने बताया कि आरोपीर सुरेन्द्र सिंह को बैंक में पड़े कैश की पहले से जानकारी थी। उसने जिस कमरे में कैश रखा था, उसके पड़ोस के कमरे की एक चाबी करीब 10-15 दिन पहले अपने पास रख ली थी। फिर उसने अपने नजदीकी रिश्तेदार महिपाल सिंह से मिलकर बैंक में रखे कैश को चुराने की योजना बनाई। मौका पाकर रविवार रात उसी चाबी से कैश शाखा के पास वाले कमरे का ताला खोला और कमरे में बनी खिड़की को तोड़कर कैश रूम में प्रवेश किया। अलमारी के लॉकर को तोड़कर उसमें रखे बैंक वसूली के रुपए व दो हस्ताक्षरशुदा खाली चैक चुरा लिए और फिर से कमरे का ताला लगाकर निकल गए। बाहर के रूम का ताला सुरक्षित लगे होने और अन्दर की खिड़की टूटी होने पर सबसे पहले शक की सुई बैंक के कर्मचारियों पर ही घूमने लगी थी।

सबके सामने अनजान बन वीडियो बनाता रहा
सोमवार सुबह बैंक खुलने पर आरोपी सुरेन्द्र सिंह सही समय पर बैंक पहुंच गया। वह घटना से अनजान बना रहा। कैशियर कालूराम ने जब अलमारी का लॉकर टूटने व कैश चोरी होने की जानकारी बैंक सभी कर्मचारियों को दी तो, वह भी साथ में मौजूद था। किसी को शक न हो, इसलिए वह भी घटना के बाद के हालात में शामिल होकर टूटे हुए अलमारी के लॉकर व कैश शाखा का मोबाइल से वीडियो बनाता रहा। घटना की सूचना अन्य लोगों को देता रहा, ताकि कोई उस पर शक न करे।

चोरी की राशि बरामद
पुलिस ने चोरी की गई राशि 5 लाख 95 हजार 150 रुपए व दो खाली हस्ताक्षरयुक्त चैक बुक आरोपी के कब्जे से बरामद कर लिए हैं। वारदात के अनुसंधान के लिए पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी के निर्देशानुसार एएसपी राजेश कुमार गुप्ता के निर्देशन में उप अधीक्षक बेनीप्रसाद मीणा, राजनगर सीआई प्रवीण टांक ने एक टीम का गठन किया था। इसमें एसआई अमृतलाल, हैड कांस्टेबल कमलेन्द्रसिंह, शक्तिसिंह, कांस्टेबल थानाराम, महेन्द्रसिंह, वीरेन्द्र कुमार, दिनेशचन्द्र, फतेहलाल आदि शामिल थे।

चार महीने पहले ही लगा था संविदा पर
सुरेन्द्र सिंह करीब 4 माह पूर्व संविदाकर्मी के रूप में सहायक कर्मचारी के पद पर तैनात हुआ था, जिसने बैंक में लाखों रुपए का लेन-देन देखा तो उसकी नीयत डोल गई। उसने बैंक का पैसा चुराने की योजना बना डाली। बैंक का ही कर्मचारी होने का फायदा उठाकर उसने कमरे की चाबी अपने पास रख ली और इस घटना को अंजाम दिया। अनुसंधान के दौरान बैंक के कर्मचारियों से गहनता से पूछताछ करने पर सुरेन्द्रसिंह (21) पुत्र भगवत सिंह निवासी किशोरनगर अपनी बातों को बार-बार बदलता रहा, जिससे उस पर शक गहराता चला गया। दोनों आरोपियों से वारदात के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

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