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चारभुजा गढ़बोर से फिर हो रहा छलावा

-मुख्यमंत्री के जाते ही चारभुजा में तमाम काम बंद, राजस्थान गौरव यात्रा के आगाज को लेकर दस दिन तक जोर-शोर से चला था काम, लोगों ने की थी काम की गति बरकरार रहने की उम्मीद
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चारभुजा गढ़बोर से फिर हो रहा छलावा

चारभुजा. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अगुवाई में गत 4 अगस्त को मेवाड़ के प्रसिद्ध तीर्थ चारभुजा गढ़बोर से रवाना राजस्थान गौरव यात्रा ने यहां के विकास कार्यों को जो गति दी, वह सीएम के जाते ही थम गईहै। अधिकारियों ने सरकार के रवाना होते ही तमाम काम बंद करवा दिए हैं। ऐसे में यहां के लोग फिर से चारभुजानाथ के नाम पर सत्ता द्वारा खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
राज्य में तीसरी बार राजे ने गत ४ अगस्त को चारभुजानाथ मंदिर से अपनी ‘चुनावी यात्रा’ शुरूकी थी। इससे पहले वर्ष २००३ और २०१३ में भी वह चुनावी यात्राएं यहां से शुरूकर चुकी हैं और दोनों ही बार उन्हें पूर्णबहुमत से सत्ता मिली। इससे उनका चारभुजानाथ में विश्वास प्रगाढ़ होता चला गया। इस तीर्थस्थल के विकास के दावे तो राजे शुरू से ही करती आ रही हैं, लेकिन लगभग १५ वर्षों में अभी तक ठोस काम नहीं हुआ है।
चूंकि पहली बार सत्ता में रहते राजे यहां आईं, तो तीसरी यात्रा से कुछ दिन पहले जिला प्रशासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान राज्य सडक़ विकास निगम और अन्य एजेंसियों ने व्यापक तैयारियों को लेकर सडक़, बिजली लाइनों के रखरखाव, सफाई और रंग-रोगन सहित कईतरह के काम युद्धस्तर पर छेड़े थे। ये काम तो सरकार की अगवानी के लिए हो ही रहे थे, छलावा बन चुकी चारभुजा विकास योजना के निर्माण कार्यों में भी अचानक तेजी आ गई थी।
राजे ने की थी ये घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने 17 करोड़ के बजट से चारभुजा के विकास की घोषणाएं की थी। अब तक इतने सालों में सिर्फ 20 लाख रुपए के काम हुए।2014 में 30 करोड़ की और घोषणा हुई। लापरवाही के कारण वह बजट लैप्स हो गया। 2018 में मात्र 6 करोड़ 75 लाख रुपए ही स्वीकृत हुए। अब तक विकास के नाम पर यहां छलावा ही हुआ।
यह है स्थिति
देवस्थान विभाग ने 4 दिन तक रात-दिन एक करके मंदिर परिसर व आस-पास में छह माह पूर्व स्वीकृत पौने सात करोड़ के बजट के काम चालू करवाए। पहले धीमी गति से चलते काम में घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की शिकायतें भी मिलीं, जिस पर आरएसआरडीसी ने अपने दो तकनीकी अधिकारियों को निलम्बित कर दिया था। अब मंदिर परिसर के आस-पास सभी कार्य बंद हो गए हैं। एक करोड़ रुपए के बजट के सौर ऊर्जा के कार्यमुख्यमंत्री के आने तक विशेष जगहों पर लगा दिए। फिलहाल मुख्य मंदिर से लाइटें भी हट गईहैं। जगह-जगह खम्भे खड़े हैं। देवस्थान धर्मशाला का मरम्मत कार्य बंद पड़ गया है। दूधतलाई पर लाइटिंग, दर्शक-दीर्घा, बेरिकेटिंग एवं फव्वारे का काम भी ठप हो गया। मंदिर चौक, मीराबाई चौक व होली चौक पर फव्वारे लगाने का काम भी ठण्डे बस्ते में चला गया है। बस स्टैंड, पार्किंगस्थल की चारदीवारी व 5 में से 3 सुलभ कॉम्प्लैक्स का काम बंद पड़ा है।