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News Punch : सरकार ने वापस ले लिया था किसानों के पौने छह करोड़ का मुआवजा

सहकारी समितियों के कार्मिक लापरवाह तो सरकार भी हो गई निष्ठुर फसल खराबे पर सरकार ने किसानों को बांटने के लिए कॉपरेटिव बैंक को दिए थे पौने छह करोड़
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News Punch : सरकार ने वापस ले लिया था किसानों के पौने छह करोड़ का मुआवजा

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

मौसम की मार व अतिवृष्टि से फसल खराबे पर सरकार ने किसानों के लिए दिए पौने छह करोड़ रुपए कार्मिकों की लापरवाही से उदयपुर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक में ही पड़े रह गए। सरकार ने भी वितरण की बजाय अप्रेल 2018 में बैंक से किसानों के मुआवजे की राशि लेकर खुद का खजाना भर लिया। सहकारी समितियों के कार्मिकों की लापरवाही और वसुंधरा सरकार की निष्ठुरता की वजह से राजसमंद के हजारों किसान ठगे गए।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में राजसमंद जिले में खरीफ व रबी फसलें खराब होने पर राज्य सरकार द्वारा खरीफ फसल में 66 हजार 312 प्रभावित किसानों की अनुदान भुगतान की अवशेष राशि 4 करोड़ 95 लाख 42 हजार 753 रुपए है, जबकि रबी फसल में 5 हजार 671 प्रभावित किसानों की अनुदान भुगतान की अवशेष राशि 79 लाख 96 हजार 797 रुपए दी उदयपुर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक में पड़ी रह गई, जो ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से बंटनी थी। सरकार ने राजसमंद जिले के किसानों के लिए करीब 44 करोड़ रुपए दी उदयपुर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक को दिए। इसके बाद बैंक द्वारा 38 करोड़ रुपए वितरित कर दिए, लेकिन अप्रेल 2018 तक भी पौने छह करोड़ रुपए की मुआवजा राशि किसानों में वितरित नहीं हो पाई। इस पर सरकार ने उदयपुर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक से किसानों में नहीं वितरित हो पाई पौने छह करोड़ की राशि वापस मांग ली। 12 अप्रेल 18 को जिला कलक्टर के नोटिस पर बैंक ने पांच करोड़ 75 लाख 39 हजार 550 रुपए राज्य सरकार के खजाने में जमा करवा दिए।

बैंक ने कमाया लाखों का ब्याज
बचत खाता का न्यूनतम ब्याज माने तब भी 4 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से पांच करोड़ का एक साल में दो लाख रुपए ब्याज बनता है, जबकि दो वर्ष में 4 लाख रुपए ब्याज बैंक ने कमा लिया। इसके अलावा अगर उक्त राशि एफडी (फिक्स डिपोजिट) की जाए, तो 8 फीसदी ब्याज दर के हिसाब से 8 से 10 लाख रुपए ब्याज हो रहा है।

तो कौन है जिम्मेदार ?
अतिवृष्टि से फसलें खराब होने के बाद सरकार दी गई मुआवजा राशि किसानों तक नहीं आखिर क्यों नहीं पहुुंच सकी। किसान अपने ही हक से वंचित रह गए। इससे अब सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस हालात के लिए कौन जिम्मेदार है ?

मुआवजा सरकारी खजाने में जमा
कुछ किसान पलायन कर गए, तो ज्यादातर ने बैंक खाता खुलवाने के लिए दस्तावेज ही नहीं दिए। जिला कलक्टर के आदेश पर किसानों के मुआवजे की अवशेष राशि वापस अप्रेल माह में ही प्रशासन को लौटा दी।
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