
लेहरूलाल की आत्महत्या के बाद भौतिक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी, खुलासा नहीं
राजसमंद. कर्ज के बोझ से परेशान होकर किसान लेहरूलाल के मौत को गले लगाने के मामले की रिपोर्ट सम्भागीय आयुक्त ने राज्य सरकार को भेज दी है। प्रशासनिक अधिकारी पूरे प्रकरण में कुछ भी बोलने या बताने को तैयार नहीं है। घटना के बाद प्रशासन ने दो बार अलग-अलग भौतिक रिपोर्ट तैयार कर भेजी।
घटना के चौथे दिन बुधवार अलसुबह प्रशासनिक दल फिर पीपली आचार्यान पहुंचा, जहां मृतक के परिजनों से मिलकर कर्जदारों के बारे में पूछताछ की। जांच में लेहरूलाल के हिस्से में उपलब्ध व राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज जमीन, उसकी कीमत, घर, मवेशी, आय के स्त्रोत, परिवार में सदस्यों की संख्या, उसके घर गुजारा किस आधार पर चल रहा था, बैंक या सहकारी समितियों में किसान के्रडिट कार्ड व ऋण बकाया है या नहीं, इन सभी बिन्दुओं के आधार पर गहन पड़ताल की। खुद के खेत व सिजारी के खेत में खराब फसल, उसकी कीमत का आकलन किया गया। कृषि और प्रशासनिक दल की संयुक्त भौतिक जांच रिपोर्ट जिला कलक्टर को सौंपी। कलक्टर और संभागीय आयुक्त भवानीसिंह देथा ने परिवार की भौतिक स्थिति की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी।
तीन लाख से ज्यादा की आय प्रभावित
नाकली के उन्नत किसान राधेश्याम कीर के मुताबिक दो बीघा खेत में बैंगन की फसल से वर्षभर में करीब 3 लाख रुपए की आमदनी हासिल की जा सकती है। बाजार के आधार पर आय 4 लाख रुपए से ज्यादा भी संभव है। कीर ने बताया कि उसने डेढ़ बीघा खेत में बैंगन की बुवाई कर तीन लाख रुपए कमाए कमाए थे, मगर उस साल बैंगन की बिक्री दर उच्च स्तर पर थी। सामान्य भाव (दर) में दो बीघा में तीन लाख की आय आसानी से हो सकती है। सम्भवत: इतनी बड़ी आय खोने का सदमा लेहरू को लगा।
कर्जदारों का दबाव तो नहीं!
राजसमंद तहसीलदार गोवर्धनसिंह झाला के नेतृत्व में आरआई अनिल यादव व पटवारी केसुलाल गुर्जर के साथ पीपली आचार्यान में मृतक के घर पहुंचे। कर्ज को लेकर किसी व्यक्ति विशेष का दबाव तो नहीं रहा, इसह्य लेकर पूछताछ की। गांव के लोगों से भी पूछताछ की।
सरकार को भेजी रिपोर्ट
परिवार की आर्थिक स्थिति की भौतिक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है।
अरविन्द पोसवाल, जिला कलक्टर, राजसमंद
Updated on:
03 Jan 2019 11:53 am
Published on:
03 Jan 2019 11:53 am
