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राजस्थान के लाल का अनोखा कारनामा! खेत की मिट्टी खराब तो प्लास्टिंग की थैलियों में उगा डाली लाखों की फसल

राजस्थान के लाल का अनोखा कारनामा! खेत की मिट्टी खराब तो प्लास्टिंग की थैलियों में उगा डाली लाखों की फसल
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Farmer

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राजसमंद। यदि मन में कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो तो असंभव भी संभव हो सकता है। ऐसे ही मनोबल का परिचय दिया रेलमगरा लापस्या के एक किसान ने। किसान ने अपने खेत पर ग्रीनहाउस लगाया लेकिन, मिट्टी खराब होने के कारण फसल की उपज नहीं ले सका, खेती के तरीके में नवाचार करते हुए प्लास्टिक की थैलियों में लाखों रुपए की फसल उगा डाली। अब इस नवाचार से न केवल खुद लाभांवित हो रहा है, बल्कि क्षेत्र के कई किसान भी उससे प्रेरित होकर उसकी तकनीक अपना रहे हैं।

नवाचारों को बनाई खेती की ताकत

जिले की रेलमगरा पंचायत समिति के लापस्या निवासी छीतरमल ने साल 2014-15 में 1008 वर्ग मीटर भूमि पर ग्रीन हाउस लगाया।इसमें कृषक की हिस्सा राशि 235000 एवं सामग्री लगभग 50000 कुल 28 5000 रुपए खर्च किए। लेकिन भूमि की ईसी (इलेक्ट्रीकल कंडक्टविटी, लवण की मात्रा) 2.57 होने के कारण इस मृदा में फसल नहीं हो पाई। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी किसान ने हार नहीं मानी।

थैलियों में उगी फसल से लाखों की उपज

किसान छितर मल ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की सलाह पर नवाचार करते हुए ग्रीनहाउस में पॉलीथीन पर खेती करने का निणर्य लिया। इसके बाद 1008 वर्ग मीटर ऐरिया में 2600 थैलियां लाइन से रखकर उनमें बाहर से लाई गई मिट्टी व वर्मीकुलाइट को निश्चित अनुपात में भरकर रख दी। इसमें एक-एक थैली पर पौधे लगाकर 110 दिन में 9.5 टन खीरे की उपज प्राप्त करने में कामयाबी हासिल की। इस उपज की आय किसान को 2.25 लाख रुपये प्राप्त हुई। इस प्रकार साल में तीन फसलों के हिसाब से कृषक ने करीब साड़े सात लाख रुपए की पैदावार कर ली। किसान की ये पहल अन्य कृषकों के लिये प्रेरणा का स्रोत साबित हुई। साथ ही युवा कृषकों का जिले में खेती के प्रति रुझान बढ़ा।

किसानों के लिए बने प्रेरणा का स्रोत

कृषि उपनिदेशक विस्तार डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि मिट्टी में लवण की मात्रा अधिकतम १ ईसी तक होनी चाहिए। इससे ज्यादा होने पर मिट्टी खराब होने लगती है। अब अन्य किसान भी खेत की खराब मिट्टी को लेकर जानकारी ले रहे हैं। किसान के खेत की मिट्टी पर ईसी की मात्रा करीब ढाई गुणा ज्यादा थी। ऐसी मिट्टी से अच्छी पैदावार लेना संभव नहीं था, उसने जो नवाचार किया, उससे अन्य किसान भी प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं। -डॉ. आरएस पाटोदिया, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र राजसमंद

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