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राजस्थान के इस आईएएस के नाम से की ठगी, 4.36 लाख निकाले ऐसे…पढ़े पूरी खबर

प्रदेश में ठगी की वारदात लगातार हो रही है। जिले के साइबर थाना पुलिस ने आईएएस के नाम पर ठगी करने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी से पैसे सहित कई सामग्री जब्त की है। पुलिस अब उसके अन्य साथियों की तलाश में जुट है।

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राजसमंद. साइबर थाना पुलिस ने भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी और सीआईएसएफ कर्मचारी बनकर फर्नीचर बेचने के नाम पर 4.36 लाख रुपए की ठगी करने वाले साइबर ठग को गिरफ्तार किया। पुलिस ने ठग के पास दो मोबाइल फोन, सिम और नकदी भी बरामद की है। पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी में जुटी है। पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने बताया कि 13 अप्रेल 2024 को कलक्ट्रेट में कार्यरत राजकीय कर्मचारी ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया कि सोशल मीडिया पर 6 अप्रेल को आईएएस अधिकारी के नाम की फेसबुक आईडी से मैसेज आया व परिचय देकर वाट्सअप नम्बर मांगे। इस पर उन्होंने फोन पर बताया कि आर्मी कैंप उदयपुर से आशीष कुमार हूं और मेरा स्थानान्तरण कहीं और हो गया। फर्नीचर की फोटो भेजी और कहा कि 80 हजार रुपए का पड़ेगा। इसके पश्चात अलग-अलग खाते से 4,36,000 लाख रुपए हड़प लिए। इसके बावजूद डिलीवरी चार्ज की मांग की गई। इस पर पीडि़त ने आईएएस अरविन्द पोसवाल से उक्त चैट एवं डील के बारे में बात की तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। इस पर पीडि़त ने साइबर अपराध वेब पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई। साइबर थानाधिकारी श्याम सिंह रत्नू पुलिस निरीक्षक ने अनुसंधान प्रारंभ किया। तत्पश्चात थानाधिकारी लक्ष्मणराम विश्नोई पुलिस निरीक्षक ने जांच प्रारंभ की। इसके पश्चात टीमें बनाकर टपूकड़ा, भिवाड़ी, तिजारा, अलवर, नगीना, मेवात हरियाणा की तरफ रवाना की गई। टीमों ने कॉल डिटेल, वॉट्सअप डिटेल व बैकिंग विश्लेषण के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उसने घटनाकारित करना कबूल कर लिया। उक्त प्रकरण में संलिप्तता पाए जाने से अभियुक्त आसिफ उर्फ अकिल खान (19) निवासी ग्राम ककराली मेव पुलिस थाना सदर अलवर को गिरफ्तार किया। पुलिस को घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन, सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट, फर्नीचर की डिटेल, उसकी रेट मोबाइल में उपलब्ध मिली। पुलिस ने आरोपी से प्रकरण की घटना संबंधित धोखाधड़ी की राशि बरामद की गई। साथ ही आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायायिक अभिरक्षा में भिजवाया गया। प्रकरण में दिगर अभियुक्तगण जो अलवर एवं डीग जिले के निवासियों की तलाश में जुटी है।

इस तरीके से देते वारदात को अंजाम

मास्टर माइंड आसिफ खान की ओर से देश के आईएएस, आईपीएस अधिकारी जिनकी सोशल मडिया प्लेटफार्म आईडी बनाकर अथवा एप पर घरेलू फर्नीचर बेचने के नाम पर पोस्ट डाली जाती है। सोशल मीडिया प्रमुख रूप से राजकीय कर्मचारी तथा अन्य सामान्य को अधिकारी की फर्जी आईडी से मैसेज कर अपने मित्र जो कि सीआईएसएफ में फर्नीचर है, जिसका ट्रांसफर अयंत्र हो जाना बताकर घरेलू फर्नीचर बेचने के नाम पर सोशल मीडिया पर झांसे में लिया जाता है। किराए अथवा धोखे से खोले गए बैंक खातों में रुपयों के ऑनलाइन ट्रांसफर करवाकर तथा ठगे गए रुपयों की कमीशन आधारित नकद निकासी करवाकर गिरोह में बांट लेते हैं।

क्या करें, क्या न करें

पुलिस अधीक्षक त्रिपाठी ने बताया कि किसी भी अधिकारी/प्रख्यात व्यक्ति की सोशल मीडिया आईडी को पहले जांच लें उसके बाद उस पर भरोसा करें अन्यथा नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार प्रख्यात व्यक्ति, बीएसएफ, सीआईएसएफ कर्मचारी के नाम से साइबर अपराधी धोखाधड़ी करते है अत: उनको पहले जांच ले तथा अनजान व्यक्ति पर भरोसा नही करें, सोशल मिडिया के माध्यम से किसी भी अंजान व्यक्ति के सम्पर्क में नहीं आए, कुरियर सर्विस की विश्वनीयता को स्थानीय लेवल पर परखें और धोखाधडी हो जाने पर तुरन्त 1930 पर कॉल करें एवं स्थानिय पुलिस थाना/साइबर पुलिस थाना पर सम्पर्क कर रिपोर्ट करें।

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