
श्रीनाथजी मंदिर में हरिरायजी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया
नाथद्वारा. पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की द्वितीयपीठ प्रभु विट्ठलनाथजी मंदिर में महाप्रभु हरिरायजी का ४२८ वांं प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया।
मंदिर के गोवर्धन पूजा चौक में द्वितीय पीठ के युवराज हरिराय बावा के सानिध्य में राजभोग की झांकी के पश्चात् आयोजित कार्यक्रम में हरिराय बावा ने वचनामृत में बड़ी दान लीला के साथ शुद्धाद्वेत ब्रह्मवाद के साकार स्वरूप के तारतम्य को सम्यक रूप से समझाते हुए प्रवचन दिया। इस अवसर पर मंदिर के जगमोहन तिबारी, गोवर्धन चौक पोल से मंदिर के नक्कारखाने तक फूलों की सजावट के साथ अलौकिक आभा सजाई गई। साथ ही विविध झांकियों से भावरूप रचा गया। इसमें ठाकुरजी के प्राकट्य भाव की झांकी ने सभी को मोहित कर दिया। वहीं, शयन आरती के दर्शनों पश्चात श्रीनाथजी, नवनीत प्रियाजी, विट्ठलनाथजी के कीर्तनकारों ने सामूहिक रूप से बैठक में बधाई गान एवं दान लीला, सांझी लीला के पदों का रसपूर्ण गान किया। वहीं, महोत्सव पर मंदिर चौक पुष्टिमार्ग में प्रश्नोतरी एवं श्रीनाथजी महाप्रभुजी के प्रथम मिलन नाट्य मंचन की विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुति दी गई। भजन-कीर्तन के साथ रात्रि के समय पुष्टिमार्गीय गरबा रास का आयोजन किया गया। संचालन मोहित मेहता ने किया।
कुरज में कलशयात्रा के साथ भागवत सप्ताह का शुभारंभ
कुंवारिया. वृन्दावन की साध्वी चंचला ने कहा कि श्रीमद्भागवत ग्रन्थ मात्र एक धार्मिक ग्रन्थ ही नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। भागवत ग्रन्थ व्यक्ति को जीवन जीने की कला सिखाता है।
वे सोमवार को कुरज में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पहले दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थी। उन्होंने भागवत ग्रन्थ का परिचय कराते हुए कहा कि यह ग्रन्थ व्यक्ति को संसार में रह कर भी संसार के मोह, माया आदि प्रलोभन व कामनाओं से दूर रहकर जीवन जीने की कला को सिखाता है। कथा के मध्य में हरिकीर्तन भी किया गया, जिस पर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर नृत्य किया।
इससे पूर्व कलश की स्थापना व पुजन किया गया। सुबह दस बजे बैण्डबाजों स्वर लहरी के साथ बड़ा मंदिर से कलशयात्रा निकाली गई। यह कस्बे के विभिन्न मोहल्लों से होते हुए आयोजन स्थल जागेटिया भवन पहुंचकर सम्पन्न हुई। वहां पर साध्वी के श्रीमुख से पहले दिन की कथा की शुरुआत हुई। कथा में पहले ही दिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंंचे, जिनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा रही।
Published on:
02 Oct 2018 05:15 pm
