
बेटियों के पालन-पोषण में गरीबी-बदनसीबी की मार
अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. सुदामा और उनकी पत्नी सुशीला की गरीबी विश्वविख्यात है, उनकी मदद भगवान श्रीकृष्ण ने की थी, लेकिन राजसमंद में एक ऐसी सुशीला है, जिसे गरीबी और बदनसीबी एक साथ मिली है लेकिन कृष्ण बनकर न तो सरकार मदद कर रही है और न भामाशाह। आज उसे अपने परिवार का पालन-पोषण करना भारी पड़ रहा है, गरीबी और बदनसीबी के चलते शनिवार को उसकी एक विक्षिप्त बेटी की मौत हो गई, शेष तीन बेटियों का पालन-पोषण भी उसके लिए कठिन परीक्षा से कम नहीं है। सुशीला मेघवाल राजसमंद मुख्यालय से करीब ३५ किमी दूर भैसाकमेड़ ग्राम पंचायत के उसरवास की निवासी है। दस वर्ष पूर्व उसके मजदूर पति प्यारेलाल मेघवाल की बीमारी से मौत हो गई तथा चार बेटियों के पालन पोषण की जिम्मेदारी सुशीला के कंधे पर आ गई, तब से आज तक वह गरीबी में ही जीवन यापन कर रही है।
विक्षिप्त बेटी ने तोड़ा दम
विधवा सुशीला के चार बेटियां थी, सबसे बड़ी बेटी १४ वर्ष की डिम्पल, उससे छोटी बेटी मानसिक विक्षिप्त सपना, टीना और सबसे छोटी बेटी तमन्ना है। सपना लम्बे समय से विक्षिप्त थी, और शनिवार को उसकी मौत हो गई। परिवार से जुड़े समाज सेवी दलीचंद मेघवाल ने बताया कि उन्होंने कईबार चिकित्सा विभाग को भी उसके उपचार केलिए कहा लेकिन आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई और १३ वर्ष की उम्र में सपना काल का ग्रास बन गई।
नहीं मिल रही कोई सहायता
दलीचंद ने बताया कि गरीब और विधवा होने के बाद भी सुशीला को किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल रही। तीन बेटियां स्कूल में पढ़ती है उसके बाद भी उनका नाम पालनहार योजना में नहीं जुड़ा है। भामाशाह नहीं बना है, खाद्य सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा, न ही उसे उज्ज्वला गैस कनेक्शन मिल पाया है।
मजदूरी के लिए भी नहीं जा पाई बाहर
अभीतक घर में विक्षिप्त बेटी होने से वह घर के आस-पास ही मजदूरी कर पाती थी, जिसके चलते महीनें में कुछ दिन ही उसे मजदूरी मिल पाती थी, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति दिनों दिन दयनीय हो गई, आज उसे दो वक्त की रोटी चलाने में भी खासी समस्या हो रही है।
दयनीय है घर की स्थिति
सुशीला का घर राउमावि उसरवास के सामने है। पीछे पहाड़ी क्षेत्र तथा कच्चा घर होने से हर समय सांप, बिच्छू, गोयरा जैसे जहरीले जंतुओं का भय बना रहता है। पहाड़ी के तरफ की खिडक़ी टूटी होने से खतरा और भी ज्यादा रहता है। यहां तक की सपना की मौत का कारण भी लोग जहरीले जीव को ही बता रहे हैं। घर में बने शौचालय में दरवाजे तक नहीं लगे हैं।
कुछ कमी होगी तो सही करवाएंगे...
अगर उसकी बेटियां स्कूल में पढ़ती हैं तो उसे पालनहार का लाभ अवश्व मिलेगा। उसने अगर पालनहार के लिए आवेदन कर रखा है तो उसमें कोई कमी होगी नहीं तो सभी का भुगतान हो चुका है, फिरभी मैं पता करवाता हूं कि आखिर भुगतान क्यों अटका है।
-मानधातासिंह, उपनिदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, राजसमंद
Published on:
21 Aug 2018 12:22 pm
