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Watch: जन्माष्टमी पर राजस्थान में यहां दी गई भगवान श्रीकृष्ण को 21 तोपों की सलामी

Shrinathji Temple Nathdwara में कृष्ण जन्मोत्सव ( Janmashtami 2019 ) धूमधाम से मनाया गया। शनिवार रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म पर शहर के रिसाला चौक में 21 तोपों की सलामी दी गई।

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Cannon Salutes In Shrinathji Temple

राजसमंद। Shrinathji Temple Nathdwara: पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ विश्व प्रसिद्ध प्रभु श्रीनाथजी मंदिर में कृष्ण जन्मोत्सव ( Janmashtami 2019 ) धूमधाम से मनाया गया। शनिवार रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म पर शहर के रिसाला चौक में 21 तोपों की सलामी ( 21 Cannon Salutes In Shrinathji Temple ) दी गई। श्रीनाथजी भगवान श्रीकृष्ण के अवतार है। भगवान श्रीनाथजी सात साल के बालक के अवतार में राजस्थान के नाथद्वारा शहर में स्थित मंदिर में विराजमान है। नाथद्वारा में कृष्ण के जन्म का स्वागत एक अनोखे ढंग से किया जाता है। यहां रात्रि को ठाकुरजी के जन्मोत्सव पर शहर के रिसाला चौक में मंदिर की परंपरानुसार दो पौराणिक तोपों के द्वारा 21 तोपों की सलामी दी गई । इन तोपों से गोलों को उसी परंपरा और विधि से दागा गया है जैसा सालों पहले इनसे दागा जाता था।

इस दौरान कमांडिंग नरोत्तम गिरि के नेतृत्व में रोलकार नाहर सिंह, स्टोर कीपर उदय सिंह, गमेर नाथ, मनोहर सिंह, किशन सिंह, सत्यनारायण नाथ व रमेश चन्द्र आदि सहित होमगार्ड के जवानों ने बारूद के गोलों आदि को लगाने एवं इस सेवा को पूर्ण करने में सहयोग किया। 21 तोपों के साथ रिसाला चौक में ( shrinathji original photo ) सलामी के नजारे को देखने यहां ठहरे श्रद्धालुओं के साथ-साथ संभाग के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सैंकड़ों श्रद्धालु आदि पहुंचे । जिसके चलते यहां आसपास में स्थित घरों की छतों आदि पर जहां जगह मिली वहां से लोगों ने यह नजारा देखा ।

इस दौरान मंदिर में अतिरिक्त जिला कलक्टर राकेश कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम सिंह सहित जिले के प्रशासनिक अधिकारी आदि भी यहां पहुंचे। श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की काले रंग की संगेमरमर की मूर्ति है। इस मूर्ति को केवल ( shrinathji temple history ) एक ही पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को ( shrinathji temple govardhan ) अपने एक हाथों पर उठाए दिखाई देते है और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देते हुए नजर आते हैं। इस मंदिर के अंदर जाने के लिए तीन प्रवेशद्वार बनाए गए है। एक प्रवेशद्वार केवल महिओं के लिए बनाया गया है जिसे सूरजपोल कहते है। माना जाता है कि ( shreenathji katha in hindi ) मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे। ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था।