
केस 1 : किसान दरियावसिंह पुत्र मोहनसिंह। निवासी फतेहनगर का खेड़ा। खेत ४९ बीघा। पैदावार ८१ क्विंटल चना। समर्थन मूल्य पर लिया गया महज 40 क्विंटल। 41 क्विंटल शेष बचा है।
केस 2 : जगदीश कुंवर पत्नी माधुसिंह। निवासी फतेहनगर का खेड़ा। खेत ४७ बीघा। पैदावार ७८ क्विंटल चना। समर्थन मूल्य पर लिया गया महज 40 क्विंटल। 38 क्विंटल शेष बचा है।
राजसमंद. अनाज की समर्थन मूल्य पर हो रही खरीद की तय सीमा, बड़े किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है। इनकी आधी से कम उपज ही तय सीमा के आधार पर बिक पा रही है। ऐसे में किसानों का कहना है कि वह अपनी शेष फसल कहां और कैसे बेचें। किसानों का आरोप है कि सरकार ने ३ क्विंटल प्रति बीघा उपज खरीदने के आदेश दे रखे हैं लेकिन यहां २ क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से खरीदारी की जा रही है, जिससे किसानों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।
मजदूरी की दर तय नहीं होने से समस्या
किसानों बताया कि सरकार ने पल्लेदारी (बोरी, उतारने चढ़ाने के श्रमिक) का भुगतान किसानों पर रखा है लेकिन इसकी कोई राशि तय नहीं की गई, जिससे मंडी में किसानों से मनमानी मजदूरी का भुगतान लिया जा रहा है।
किसानों को लग रहा दोहरा भाड़ा
मंडी पर अपनी उपज लेकर आ रहे किसानों को भाड़े का दोहरा भुगतान देना पड़ रहा है। ऑनलाइन खरीददारी होने के चलते किसान रसीद में अंकित फसल ही यहां बेच सकता है, ऐसे में अनाज कम-ज्यादा हो जाता है। कम होने पर उसे दोबारा अनाज मंडी लाना पड़ता है और ज्यादा होने पर उसे दोबारा भाड़ा लगाकर घर ले जाना पड़ता है।
ऊपर से 40 क्विंटल की ही आदेश है...
मामले में सहकारिता विभाग के कुलदीपसिंह राठौड़ का कहना है कि हमें ऊपर से ४० क्विंटल से अधिक खरीदने के आदेश नहीं हैं, इसलिए अधिकतम इतना ही ले सकते हैं। बीघा का हिसाब ऑनलाइन बिक्री के आवेदन के दौरान ही तय होता है। इसमें ईमित्र जितना चढ़ा देता है उतने की रसीद आती है। हम रसीद से ऊपर एक किलो भी नहीं ले सकते।
Published on:
02 May 2018 09:59 am
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