
मकर संक्रांति कल, तिल के व्यंजनों से महका बाजार
राजसमंद. मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। 14 जनवरी को शाम 5.46 मिनट पर मकर संक्रांति लगेगी। इससे दानपुण्य सहित अन्य आयोजन १५ को होंगे। क्योंकि रात्रि को सरोवर स्नान आदि नहीं किए जाते, ऐसे में पर्व 15 को ही मनाया जाएगा। इस पर्व का महत्व धार्मिक आस्था के साथ ही वैज्ञानिक दृष्टि से भी अहम है। जानकार बताते हैं कि इसका सूर्य और जल से गहरा जुड़ाव होता है।
ज्योतिष भरत खंडेलवाल ने बताया कि सन् 2008 से हर चौथे वर्ष मकर संक्रांति १५ जनवरी को पड़ रही है। इसका मुख्य कारण पृथ्वी के चक्कर लगाने की गति में कमी आना है। उनकी माने तो प्राचीन काल में मकर संक्रांति 13 जनवरी को होती थी। धीरे-धीरे यह 14 जनवरी को होने लगी। उनके अनुसार 2023 व 27 को भी मकर संक्रांति 15 जनवरी पड़ेगी।
वैज्ञानिक महत्व
खंडेलवाल ने बताया कि मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। इस ब्रह्मांड में दो तरह के पिंड माने गए हैं। ऑक्सीजन प्रधान और कार्बनडाई ऑक्साइड प्रधान। मकर संक्रांति से सूर्य का तेज प्रभावी होने लगता है। शीतऋतु के बाद जब सूर्य की किरणें तेज होती है तो पानी से मिलकर वाष्पन क्रिया करती हैं। इस वाष्पन में ऑक्सीजन प्रधान तत्व ज्यादा होते हैं, जो शरीर के लिए अधिक लाभ दायक होते हैं।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसदिन नदियों में स्नान करना चाहिए। सूर्य को जल अर्पण कर चावल, तिल, अन्न, वस्त्र, सोने, चांदी का दान करना चाहिए। जिससे मानसिक शांति मिलती है तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
सज गया बाजार
मकर संक्रांति पर्व को लेकर बाजार में गुडतिल के लड्डू, तिल पपड़ी, गजक सहित तिल से बने विविध व्यंजनों से बाजार सज गया है। वहीं मकर संक्रांति को होने वाले विविध खेलों को लेकर युवाओं तथा बच्चों में उत्साह है। इससे खेल सामग्री की दुकानों पर भी ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। गौरतलब है कि जिले में मगर संक्रांति को विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।
Updated on:
13 Jan 2019 06:36 pm
Published on:
13 Jan 2019 06:36 pm
