
12 हजार माताओं ने जन्मे चार से ज्यादा बच्चे
राजसमंद. शिक्षा और जागरूकता की कमी की वजह से हमारे जिले में मां की कोख पर बोझ बहुत ज्यादा है। तकरीबन १२ हजार से ज्यादा मांओं ने चार और इससे भी ज्यादा बच्चों को जन्म दिया है, जबकि सरकार दो बच्चों के परिवार पर जोर दे रही है। कई परिवारों में 13-14 तक बच्चे भी पल रहे हैं। पैदा करने के बाद उनकी परवरिश का ही जिम्मा भी मां के कमजोर हो रहे कंधों पर ही है। जिले के कुम्भलगढ़ और खमनोर ब्लॉक में शिक्षा का स्तर कमजोर है। पिछड़े तबकों, खासकर आदिवासी परिवारों में परिवार कल्याण को लेकर जागरूकता की कमी देखने को मिलती है। इसी वजह से अनेक बस्तियों में एक परिवार में आधा दर्जन और दर्जनभर बच्चों का जन्म हुआ। रूढ़ीवादिता, रिवाज और बेटे की चाहत में भी इतनी अधिक संख्या में संतानोत्पत्ति का स्याह पक्ष सामने आ रहा है। राजसमंद जिले में महिला शिक्षा का स्तर काफी नीचे है। यहां तक कि राज्य के औसत से भी काफी कम है। जिले में निसंतान या नवदम्पतियों की संख्या 14339 है, वहीं एक बच्चे वाले 31,206, दो बच्चे वाले 32,574, तीन बच्चों वाले 16,799 तथा चार या इससे अधिक संख्या में बच्चों वाले दम्पती 12117 हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने ‘मां को मां रहने दो मत समझो मशीन’ अभियान शुरू किया, जिसके तहत २१ सितम्बर को ‘बेटे की चाहत में नौ बेटियां जन्मी, बेटा कोख में आया तो मौत भी आ गई’, २३ सितम्बर को ‘८० फीसदी महिलाओं में खून की कमी खतरनाक’, २५ सितम्बर को ‘वंश की बेल बढ़ाने के फेर में अंदर से टूट रही महिला!’, खबरें प्रकाशित कर महिलाओं की पीड़ा तथा समाज में वंशवाद की परम्परा को उजागर किया। इसके बाद विभाग ने प्रजनन दर पर लगाम लगाने के लिए जिले के ९६९ गांवों में सास बहू सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें एएनएम एवं आशा मिलकर गांव में किसी उचित स्थान आंगनबाड़ी केन्द्र, स्वास्थ्य केन्द्र, अटल सेवा केन्द्र पर सास-बहू को परिवार कल्याण की जानकारी देकर साधन अपनाने की अपील करेंगी।
Published on:
29 Sept 2018 10:43 am
