
अब एनीमिया मुक्त होगा राजस्थान
अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. प्रदेश सरकार एनीमिया से दो-दो हाथ की तैयारी में है। रोकथाम के लिए 29 जनवरी से 'एनीमिया मुक्त राजस्थानÓ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 5 माह से लेकर 24 वर्ष तक के सभी लोगों को इसकी दवाएं दी जाएंगी। वहीं 49 वर्ष तक की गर्भवती महिलाओं को भी इसका लाभ दिया जाएगा। गौरतलब है कि प्रदेश में हर वर्ष सैकड़ों बच्चों और गर्भवती महिलाओं की मौत खून की कमी से हो जाती है।
ऐसे चलेगा अभियान
प्रदेश में 29 जनवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान की शुरुआत करेंगे। जिला स्तर पर कलक्टर आईएफए की गोली खिलाकर इसका शुभारंभ करेंगे। दवा देने के लिए छह समूह बनाए गए हैं। जिसके प्रथम समूह में 5 से 59 माह तक के बच्चों को आंगनवाड़ी के माध्यम (आईएफए सीरप) दिया जाएगा। 5 से 9 वर्ष तक के बच्चों को (आईएफए गुलाबी टेबलेट), 10 से 19 वर्ष तक के बच्चों को (आईएफए ब्लू टेबलेट), 20 से 24 वर्ष तक की महिलाओं को (मिशन परिवार विकास के अंतरगत), 15 से 49 वर्ष तक की गर्भवती महिलाएं तथा सभी धात्री माताओं को यह दवा दी जाएगी।
शाला दर्पण और पोर्टल पर भी रिपोर्टिंग
इस अभियान के तहत बच्चों को दवाएं आंगनवाड़ी और स्कूलों के माध्यम से दी जाएगी। इसलिए आंगनवाड़ी केंद्रों की रिपोर्टिंग एचएमआईएस सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी वहीं स्कूलों में दी जाने वाली दवा को पोर्टल और शाला दर्पण के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। गर्भवती और धात्रियों को दवा का वितरण आशा और एएनएम के जिम्मे रहेगा।
यह है एनीमिया
शरीर में हिमोग्लोबिन एक ऐसा तत्व है जो शरीर में खून की मात्रा बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत तथा महिलाओं में 11 से 14 के बीच होना चाहिए। लेकिन अच्छा खान-पान नहीं मिलने तथा महिला के बार-बार गर्भवती होने, प्रसव के दौरान अत्याधिक रक्तस्राव होने तथा लम्बी बीमारी सहित अन्य कारणों से शरीर में खून की कमी होने को एनीमिया कहते हैं। प्रदेश में 70 फीसदी से अधिक महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं।
इनका कहना है...
प्रदेश में 29 जनवरी से एनीमिया मुक्त राजस्थान अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए आंगनवाड़ी केंद्रों, स्कूलों में आईएफए की दवाएं पहुंचा दी जाएंगी। इनका वितरण वहीं से होना है।
-डॉ. पंकज गौड़, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, राजसमंद
Published on:
23 Jan 2019 07:37 pm
