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परंपरागत फसलों का ही होता है बीमा

नवाचार के दौरान प्राकृतिक आपदा होने पर किसान को भुगतना पड़ता है नुकसान, जिले में रबी के लिए सिर्फ गेहूं, जौ, सरसों ही है बीमित फसलें
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परंपरागत फसलों का ही होता है बीमा

अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए परम्परागत खेती से हटकर नवाचार करते हैं, कृषि विभाग भी इसकी सलाह देता है, लेकिन सरकार और बीमा कम्पनियां नवाचार को प्रोत्साहन देने की बजाए किसान के अधिकारों का ही हनन कर रही हैं। मामला फसल बीमा योजना का है। प्रदेश में 90 फीसदी उन्हीं फसलों का बीमा होता है, जो परम्परागत हैं, शेष फसलों का बीमा नहीं होता। किसान अपने खेतों पर अगर नवाचार कर फसलों की बुवाई करता है और प्राकृतिक आपदा होती है, तो उसे बीमा क्लेम तक नहीं मिलता। हर वर्ष बीमा कम्पनियां जिले के अनुसार सबसे अधिक बोई जाने वाली फसलों को इसके दायरे में लेती हैं। जिले में इस वर्ष रबी की फसल के लिए गेंहू, जौ, चना की फसलों को ही बीमित फसल के दायरे में रखा गया है। जबकि अन्य फसलें भगवान फरोसे ही हैं। आर्थिक संकटों से जूझ रहे किसानों के सामने अब बड़ा संकट यह है कि वह बीमा का लाभ लेने के लिए परम्परागत खेती करें या फिर आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भागवान भरोसे होकर खेतों पर नवाचार करे।


नवाचार पर गिरी गाज
इसबार रबी की फसल फलने फूलने लायक होते ही पाले की चपेट में आ गई, इससे जिले के परम्परागत के फसलों के अलावा 3500 हैक्टेयर में बोई गई बैगन, पपीता, टमाटर, मिर्ची सहित कई प्रकार की सब्जियों आदि फसलों पर भारी नुकसान हुआ, जिसमें पपीते के कई किसान तो बैंकों के कर्जदार भी हो गए, लेकिन इन फसलों को बीमित के अंदर नहीं माना जा रहा, जिससे किसानों के लाखों रुपए बर्बाद हो गए और वह आर्थिक तंगी में फंस गए हैं।


हर ब्लॉक में अलग-अलग फसलों का बीमा
जिले में इसबार रबी की 38 हजार हैक्टेयर भूमि में बुवाई हुई है। पूरे जिले में सिर्फ चार प्रमुख फसलों गेहूं, जौ, चना, सरसो को ही बीमा के दायरे में लिया गया है। इसमें भी प्रत्येक ब्लॉक से अलग-अलग फसलों का चयन किया गया है, जिसमें राजसमंद में गेहूं और जौ, आमेट में गेहूं और जौ, रेलमगरा के लिए सरसो, कुंभलगढ़, खमनोर के लिए गेहूं को ही बीमित फसल माना गया है।


यह हुई है बुवाई
फसल भूमि
गेहूं 24000 हैक्टेयर
जौ 7700 हैक्टेयर
चना 1350 हैक्टेयर
सरसो 1450 हैक्टेयर
अन्य 3500 हैक्टेयर
कुल 38000 हैक्टेयर


जिले की चार फसलों का बीमा...
जिले में सबसे अधिक बोई जाने वाली फसलों को बीमा के दायरे में लिया जाता है, कौनसी फसल बीमा के दायरे में आएगी और कौनसी नहीं आएगी, इसका फैसला बीमा कम्पनियां और सरकार करती हैं। इसवर्ष रबी के लिए जिले की चार प्रमुख फसलें गेहूं, जौ, चना, सरसो को इसमें लिया गया है। इसमें भी ब्लॉक के अनुसार अलग-अलग फसलें हैं, जिनका बीमा हुआ है।
-डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा, उपनिदेशक (कृषि विस्तार), राजसमंद

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