
अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद . वनविभाग द्वारा 5 से ९ जनवरी तक करीब एक दर्जन जलाशयों में कराई गई पक्षी गणना में आठ वर्ष बाद ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब पक्षी नजर आया है। जो हिमालय और दक्षिण एसिया से यहां आते हैं। जानकार बताते हैं कि यह पक्षी काफी खूबसूरत होते हैं। यूरोप से आने वाले नार्थरेन सावलर की संख्या में कमी देखी गई है। पेलिकन, सारस के्रन, टफटेड डक, ग्रेटर फ्लेमिंगोज जैसे पक्षियों की अच्छी खासी संख्या देखी गई।
लम्बी दूरी तयकर आता है ऑस्प्रे
पक्षी प्रेमी हिमांशुसिंह चंद्रावत ने बताया कि ऑस्प्रे रसिया आदि देशों से आते हैं। यह मछली खाते हैं। देखने में काफी खूबसूरत होते हैं। देवगढ़ तालाब में यह केवल एक नजर आया था, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कम संख्या में ही आए थे। उन्होंने बताया कि इसबार नार्थरेन शॉवलर की संख्या में काफी कमी देखने को मिली, पिछलीबार जब पक्षी गणना हुई थी तो यहां 5 हजार से ज्यादा यह पक्षी दिखे थे, लेकिन इसबार 500 के भीतर ही सिमट गए। उन्होंने बताया कि एसिया और यूरोप से आने वाला पेलिकन पक्षी जब उडऩे के लिए पंख फैलाता है तो 11-11 फीट तक का हो जाता है। उन्होंने बताया कि गणना के दौरान झील किनारे सारस के्रन का झुंड भी नजर आया था। हालांकि यह पक्षी देसी ही है लेकिन अब कम नजर आने लगे हैं।
मुख्य रूप से यह दिखे पक्षी
नाम संख्या
कामनकूट 6000
ग्रेट व्हाइट पेलिकन 43
ग्रेटर फ्लेमिंगो 101
बार हैडेड गोस 157
नार्थरेन शॉवलर 568
ग्रेट के्रसटेड ग्रीब 1
ओसप्री ०१
पैड एबोसेट ०४
लिटिल ग्रीब 442
ब्लैक टेल्ड गोडविट 83
गडवाल 176
नोट : मुख्य यह पक्षी है
राजसमंद झील, अजमेर के रोडियाना तालाब, रावली, भुजारेल व पाली के कंटालिया, सारण तालाब, राज्यवास सहित एक दर्जन तालाबों में गणना हुई थी।
जलाशयों की संख्या बढ़ाएंगे…
इसबार करीब 12 दर्जन जलाशयों पर पक्षी गणना करवाई गई थी, अगले वर्ष से जलाशयों की संख्या और बढ़ाएंगे। गणना के दौरान हमने करीब 42 प्रजाति के देसी-विदेशी पक्षियों की संख्या दर्ज की है। इनमें से कुछ बहुत ही खास और खूबसूरत पक्षी है। यहां के तालाबों की हालत काफी खराब है, अगर इनका पानी स्वच्छ हो तो यहां पक्षियों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। हम इस ओर भी प्रयास करेंगे।
-फतेहसिंह राठौड़, डीएफओ, राजसमंद