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राजसमंद में अगले 50 साल की जरूरत के मद्देनजर 1350 बंदियों की क्षमता की दो जेलें बनेंगी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक में कारागृह निर्माण के लिए जमीन आवंटन की अनुशंसा  
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कारागृहों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे का आंकलन, विस्तार, नवीन कारागृहों का निर्माण निर्धारित मानकों को पूरा करने के सम्बंध में चर्चा के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) अध्यक्ष राघवेन्द्र काछवाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक हुई।

प्राधिकरण सचिव मनीष कुमार वैष्णव ने बताया कि वर्तमान में जिला कारागृह व उपकारागृह की क्षमता के विरुद्ध निरुद्ध बंदियों की संख्या, राजसमंद न्यायक्षेत्र के प्रकरणों में जिले से बाहर अन्यत्र कारागृहों में निरुद्ध बंदियों की संख्या, वर्तमान में नवीन जिला कारागृह व उपकारागृह के निर्माण के लिए तय की गई बंदियों की क्षमता अनुसार आवंटित भूमि, कारागृह निर्माण के बजट व अब तक किए कार्यों पर विचार-विमर्श हुआ। जिला कारागृह के लिए 500 बंदी एवं उपकारागृह भीम के लिए 250 बंदियों की क्षमता अनुसार भूमि आवंटित की है, जो भविष्य की 50 वर्षों की आवश्यकता के मद्देनजर पर्याप्त नहीं है। जिला कारागृह के लिए कुल 850 बंदियों की क्षमता अनुसार व उपकारागृह भीम में 500 बंदियों की क्षमता अनुसार जमीन आवंटित करवाने, कारागृहों में महिला बंदियों के लिए पृथक से महिला जेल-बैरक की व्यवस्था का निर्णय लिया। कैदियों से सहज मुलाकात और टेली मेडिसिन सुविधाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करवाने की विस्तृत कार्ययोजना व अभिशंसा के साथ प्रस्ताव महानिदेशालय कारागार, जयपुर के माध्यम से राज्य सरकार को भिजवाना तय हुआ। बैठक में जिला कलक्टर डॉ. भंवरलाल चौधरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनंत कुमार, जिला कारागृह उपाधीक्षक हेमन्त सालवी भी मौजूद थे।