
देवगढ़ के संग्राम सागर में दिखे भारी पक्षी रोजी पेलिकन
प्रमोद भटनागर
देवगढ़. नगर के रोडवेज बस स्टैण्ड के सामने संग्राम सागर (सांगेला) में शुक्रवार सुबह दिखाई दिया विदेशी पक्षी रोजी पेलिकन का झुंड लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया।
पक्षीविद् मनीष सोनी ने बताया कि इस पक्षी को रोजी पेलिकन के अतिरिक्त ग्रीट व्हाइट पेलिकन के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दी में इसे गुलाबी हवासील कहा जाता है। यह एक वजनदार एवं बड़े आकार का पक्षी है। इसमें नर पक्षी का वजन 9 से 15 किलोग्राम तक होता है। इतना वजन होने के बावजूद यह मजबूत व तेज उडऩे वाला पक्षी है। भारत में यह पक्षी उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों मुख्यत गुजरात में कच्छ व इसके आसपास काफी संख्या में आते हैं। ये मुख्यता साइबेरिया और पूर्वी यूरोप से जब वहां बर्फ पडऩे लगी है तो हजारों किलोमीटर उड़ान भरकर प्रजनन व भोजन के लिए भारत में आते हैं। शीत ऋतु की दस्तक के साथ ही इस पक्षी का भारत में आना आरंभ हो जाता है। यह पक्षी प्रवास के दौरान तीन हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक वी आकार में उड़कर यहां आते हैं।
चोंच से ही लेता है सांस
इन पक्षियों की चोंच लंबी होती है और चोंच का निचला हिस्सा गले तक थैलीनुमा होता है। इसका प्रयोग ये पक्षी मछली को पकडऩे के लिए करते हैं। ये चोंच को खोलकर पानी में डूबा कर रखते हैं। चोंच की इस थैली में काफी पानी आ जाता है। पानी के साथ आई मछली को जब गर्दन पानी से बाहर निकालते है व इस थैली को सिकोड़ते हैं तो इससे पानी बाहर आ आता है और ये मछली को निगल जाता है। अपने झ्ल्लिीदार पंजों की वजह से यह पक्षी तैरते हुए ही पानी की सतह से उड़ान भर सकते हैं। इन पक्षियों की नाक नहीं होती, चोंच से ही सांस लेते हैं।
मिट्टी व तिनके एकत्रित कर बनाते हैं बड़ा घोंसला
हवासील का प्रजनन का समय फरवरी से अप्रैल तक होता है। ये आमतौर पर पानी के किनारे मिट्टी व तिनके आदि एकत्रित कर बड़ा घोंसला बनाते हैं। एक ही जगह पर काफी संख्या में घोंसले होते हैं। प्रजनन के समय नर पक्षी के चेहरे का रंग गुलाबी व मादा का रंग नारंगी जैसा होता है। ये पक्षी साफ पर्यावरण में ही रहना पसंद करते हैं।
Published on:
02 Mar 2019 12:44 pm
