
यहां का प्रशासन पहले तो पीओपी की प्रतिमाएं बनने देता है, फिर मूर्ति स्थापना के वक्त करता है कार्रवाई
देवगढ़, मोहित माहेश्वरी. गणेश चतुर्थी सितम्बर माह में है लेकिन यहां मूर्ति निर्माण का काम अभी से जोरों पर है। देवगढ़ के ओसवाल भवन के पास मुख्य रोड के किनारे पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से मूर्ति निर्माण कार्य खुलेआम किया जा रहा है, जबकि पिछले दो वर्षों से प्रशासन जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए इन मूर्तियों पर रोक लगाने के आदेश देता है, लेकिन जब मूर्तियों का निर्माण हो रहा है तब उन्हें कोई नहीं रोक रहा। पिछले वर्ष भी इसतरह की मूर्तियां नगर में आई थीं और जब पुलिस थाने में सीएलजी की बैठक में ये मुद्दा उठाया गया तो देवगढ़ एसडीएम ने कहा था कि इस वर्ष तो नहीं अगले वर्ष इन मूर्तियों को बनाने और खरीदने ही नहीं दिया जाएगा।
दो वर्ष पूर्व लगी थी रोक
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मूर्ति निर्माण और मूर्ति व ताजिए विसर्जित करने के लिए गाइडलाइन तय की थी। इस आधार पर प्रशासन पीओपी, केमिकल और रसायनिक रंगों से बन रही मूर्तियों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है।
बोर्ड ने नहीं की पहल
पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने योजना बनाई थी कि पीओपी मूर्ति खरीदने से रोकने की शुरुआत स्कूलों से की जाएगी। गणेश स्थापना में बच्चों की विशेष रुचि होती है। बच्चों को पीओपी के नुकसान और मिट्टी से बनी मूर्ति के फायदे बताए जाएंगे, लेकिन पहल नहीं करने से यह योजना धरी की धरी रह गई। गौरतलब है कि पीओपी में जिप्सम, सल्फर, फॉस्फोरस और मैग्निशियम होने से यह पानी को विशैला बना देता है। प्रतिमाओं में लगाए जाने वाले रंगों में मरकरी, लेड, कैडियम और कार्बन होने से पानी में एसिड बन जाता है।
यह हैं नियम
मूर्तियों का निर्माण परंपरागत मिट्टी से हो।
पीओपी या किसी रसायनिक वस्तु का उपयोग न हो।
प्राकृतिक व गैर विशाक्त रंग ही काम में लें।
मिट्टी की मूर्तियों की बिक्री की ही अनुमति हो।
विसर्जन में पूजन सामग्री, सजावटी सामान, बांस, रस्सी आदि अलग किए जाएं।
पाबंद करेंगे...
जिन स्थानों पर पीओपी की मूर्तियां बन रही या बिक रही हैं, उन्हें पाबंद किया जाएगा। साथ ही पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए आमजन को मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं ही खरीदने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
केआर चौहान, एसडीएम देवगढ़
Published on:
06 Jul 2018 11:19 am
