
राजसमंद. गांधी सेवा सदन के तत्वावधान में ‘शिक्षा-शिक्षण संस्थाओं की स्वायतत्ता’ विषयक शिक्षा संगोष्ठी देवेंद्र सभागार गांधी सेवा सदन में हुई। संगोष्ठी में प्रो. रोशनलाल महात्मा ने कहा राजनीतिक गलियारों से आए शिक्षाविदों ने आचार्य की स्वतंत्रता छीन ली है। पाठ्यक्रम पूर्ण करने की बाध्यता से शिक्षा अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंच सकेगी? सत्तापक्ष के नियंत्रण, फैसले, योजनाएं, सरकारी स्कूलों की तरह निजी शिक्षण संस्थाओं को अकर्मण्य बनाना चाहती है। सरकारी विद्यालयों में 80 फीसदी संसाधन उपलब्ध है, मगर मूलभूत सुविधाएं जैसे प्रयोगशाला, शौचालय नहीं है। सेन्ट एंटोनी वि. उदयपुर के विलियन डिसूजा ने कहा कि प्रतिष्ठित अच्छे शिक्षण संस्थाओं ने अपने आप को सीमित कर लिया, जिससे अभिभावक शिक्षा को व्यवसाय बना देने वाली शिक्षण संस्थाओं की ओर उन्मुख हो गए। सरकारी नीतियों ने अच्छे विद्यालयों को दुविधाग्रस्त कर दिया व व्यावसायिक शिक्षा नीति वाले विद्यालय मनमर्जी चला रहे हैं और समर्पित स्वस्थ विद्यालय नियमों में बंधे है। एलपीएस स्कूल प्राचार्य डॉ. संजय अभिषेक ने कहा कि सरकार आजादी के इतने वर्षों बाद शिक्षण संस्थाओं की स्वायत्तता पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है जो मैकाले की शिक्षा नीति का स्मरण कराती हैं।
शिक्षा को राजनीति से दूर रखी जाए
एलपीएस स्कूल के निदेशक अनिल मिश्रा ने कहा कि भौगोलिक संरचना के आधार पर पाठ्यक्रम एक जैसा नहीं हो सकता। सिर्फ भाषा व संस्कृति की शिक्षा ही समान हो सकती है। इस बात को सरकार को समझना होगा। 5 से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने वाले संस्थानों में फीस एक्ट लागू न हो व शिक्षा को राजनीति से दूर रखा जाए। आलोक संस्थान के सुनील त्रिपाठी ने कहा सरकार शिक्षण संस्थानों को आर्थिक सहायता नहीं देती है, तो स्वायत्तता नियंत्रण का अधिकार नहीं है। गांधी सेवा सदन के मंत्री अणुव्रत प्रवक्ता डॉ.महेन्द्र कर्णावट ने कहा शिक्षा यात्रा में सरकार और निजी विद्यालय सहयात्री बनकर शिक्षा के उद्दिष्ट गन्तव्य तक पहुंचने की कोशिश करें। अधिकांश निजी शिक्षण संस्थान सेवा भावना से संचालित हो रहे हैं, जो कम फीस लेकर शिक्षा दीक्षा की ज्योति को प्रज्वलित रखे हुए हैं। शिक्षा स्वतंत्र और स्वावलम्बी होनी चाहिए।
दलों ने पेश किया चर्चा का सार
गोष्ठी में प्रतिनिधियों ने चार दलों में विभक्त होकर विषय पर चर्चा की तथा दल प्रमुख डीके गुप्ता उदयपुर, नरपतसिंह जोधपुर , डॉ. एके मिश्रा आमेट, प्रवीण त्रिवेदी बांसवाड़ा ने दल चर्चा का सार प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में साहित्यकार कमर मेवाड़ी, अफजल खां अफजल, डॉ. हीरालाल श्रीमाली, चतुर कोठारी, जीतमल कच्छारा, रामसहाय विजयवर्गीय, रेणु दीक्षित, मोहनलाल पालीवाल, मोहनलाल गुर्जर, भगवत शर्मा सहित साठ शिक्षाविदों की उपस्थिति रही। गांधी सेवा सदन के कार्यवाहक अध्यक्ष डूंगरसिंह कर्णावट ने कहा सरकारी बंधनों से मुक्त शिक्षा ही राष्ट्रभक्त सह नागरिकों का निर्माण करेगी।
Published on:
27 Dec 2017 12:58 pm
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