पैनोरमा के गौरव पर छोड़े खामियों के धब्बे, सैलानियों की भावना को कर रहीं आहत

पैनोरमा के गौरव पर छोड़े खामियों के धब्बे, सैलानियों की भावना को कर रहीं आहत

laxman singh | Publish: Sep, 11 2018 12:59:46 PM (IST) Rajsamand, Rajasthan, India

हाड़ी रानी के मॉडल की जगह लगाया कटआउट, भ्रम पैदाकर रही श्रीनाथजी के मेवाड़ आगमन की तिथि

अश्वनीप्रताप सिंह @ राजसमंद
राणा राज सिंह पैनोरमा जहां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, वहीं पेनोरमा निर्माण की कुछ खामियां सैलानियों को आहत कर रही हैं। इसमें श्रीनाथजी के मेवाड़ आगमन की भ्रामक तिथि संशय पैदा करती है, तो सभी मॉडल्स की तरह हाड़ीरानी का मॉडल नहीं होना आहत करता है। मॉडल्स के पास उनका पूरा परिचय भी अंकित नहीं है। पर्यटकों के मन में उनके बारे में जिज्ञासाएं शांत नहीं हो पा रही हैं। पैनोरमा पांच दीर्घाओं में बना है। प्रथम दीर्घा में राणा राजसिंह के तिलक का प्रसंग दर्शाया है। राणा राजसिंह सिंहासन पर बैठे हैं तथा राजपुरोहित तिलक लगाने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। राजपुरोहित के सामने एक सामंत थाल में तलवार लिए खड़ा है। सामने जो सामंत है, उसके सिर पर मेवाड़ी पगड़ी न होकर सरदारों की सी पगड़ी लगी है। दाढ़ी भी सरदार जैसी लगती है। दर्शकों के मन में राजपुरोहित तथा सामंत के बारे में जानने की उत्सुकता जगती है, लेकिन कहीं उनका पूर्ण परिचय नहीं है।


बैठक में भी लगाया फ्लैक्स
पांचवीं दीर्घा में राणा राजसिंह की बैठक का एक चित्रण किया गया है। इसमें राणा राजसिंह, गुुरु गोविंद सिंह, शिवाजी महाराज, राजा छत्रसाल को चर्चा करते हुए दिखाया है। इसमें तीन मॉडल लगाए हैं, जबकि गुरु गोविंदसिंह का फ्लैक्स लगा है।


महाराणा के जन्म से पूर्व श्रीनाथजी का मेवाड़ पदार्पण!
दूसरी दीर्घा में कई मॉडल्स के साथ ही एक मंदिरनुमा कक्ष में श्रीनाथजी का भव्य विग्रह विराजित है। बाहर उनके मेवाड़ आगामन के बारे में बताया है। लेख के अनुसार 'औरंगजेब के फरमान से हिंदुओं के आराध्य स्थलों-मंदिरों को गिराने की कड़ी में जब ब्रजक्षेत्र में वल्लभ सम्प्रदाय के मंदिरों को ध्वस्त किया जाने लगा, तब वहां के गुंसाई ने देव-विग्रहों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान किया। महाराणा राजसिंह को शक्तिशाली एवं धर्मनिष्ठ शासक जानकार गुंसाई दामोदर श्रीनाथजी की मूर्ति को लेकर मेवाड़ आए। महाराणा ने उनका स्वागत किया एवं दामोदर गुंसाई को श्रीनाथजी की प्रतिमा की रक्षा का वचन दिया, 20 फरवरी 1627 ई. में सिंहाड़ गांव में बनास नदी के किनारे भव्य मंदिर निर्मित करवाकर श्रीनाथजी की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। यही मंदिर कालांतर में नाथद्वारा मंदिर श्रीनाथजी मंदिर के नाम से विख्यात हुआ। इस लेख में श्रीनाथजी के मेवाड़ पधारने की तिथि 20 फरवरी 1627 ई. लिखी है, जबकि महाराणा राजसिंह का जन्म 1629 ई. में हुआ था, और महाराणा ने ही मंदिर का निर्माण करवाया था। दरअसल, श्रीनाथजी के आगमन का जो लेख मिलता है, उसके हिसाब से श्रीनाथजी सं. 1726 को मथुरा से प्रस्थान कर बांसवाड़ा, कोटा, बूंदी, डूंगरपुर, मारवाड़, शाहपुरा, उदयपुर फिर घसियार होते हुए सिंहाड़ नाथद्वारा में सं.1728 (ई.1668) में पधारे।

हाड़ीरानी का मॉडल क्यों नहीं?
पैनोरमा के प्रथम तल पर चौथी दीर्घा है। इस दीर्घा में प्रवेश करते ही हाड़ीरानी के बलिदान का दृश्य दर्शाया है। हाड़ीरानी एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में एक थाल पर अपना कटा हुआ शीश लिए हैं तथा धड़ खड़ा हुआ है। यह दृश्य त्याग और बलिदान को दर्शाता है, लेकिन सभी जगह मॉडल्स लगाए हैं, जबकि इस बलिदान का कटआउट लगाकर दृश्य का प्रभाव कम कर दिया है।

छत्रसाल के लिखे दो नाम
यहां बनी दीर्घाओं में बूंदी के राजा छत्रसाल के दो अलग-अलग नाम लिखे गए हैं, जिसमें एक जगह राजा छत्रसाल तथा दूसरी जगह राजा शत्रुसाल लिखा है। हालांकि यह दोनों नाम इतिहास में भी पाए जाते हैं, लेकिन एक ही पैनोरमा में दो नाम दर्शकों को भ्रमित करते हैं।

त्रुटियों में सुधार होना चाहिए...
पैनोरमा बहुत ही खूबसूरत बना है। इसे देखने से कुछ त्रुटियां नजर आती हैं। हाड़ीरानी का बलिदान महान है। जब सभी जगह मॉडल्स लगाए हैं तो यहां भी मॉडल होना चाहिए।
दिनेश श्रीमाली, शिक्षाविद, राजसमंद

 

पैनोरमा में अगर कोई कोई त्रुटियां हैं, तो उन्हें दिखवा कर सही करवाया जाएगा। औंकारसिंह लखावत, अध्यक्ष, राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण, जयपुर

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