
चारभुजा मंदिर विस्तार योजना में करोड़ों रुपए की लीपापोती!
अश्वनी प्रतापसिंह/हीरालाल पालीवाल @ राजसमंद/चारभुजा. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की आस्था के केंद्र चारभुजा में मंदिर विस्तार योजना का जमकर मजाक बनाया जा रहा है। जिम्मेदार इसकी अहमियत जानने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और करोड़ों रुपए की योजना लीपापोती का शिकार हो रही है। निर्माण में खुल कर अनियमितताएं सामने आई हैं। दूधतलाई से लेकर बस स्टैंड के पास मरम्मत की जा रही जर्जर धर्मशाला तक के कार्य सवालों के घेरे में है। जहां दूध तलाई में नक्शे के अनुरूप काम नहीं किए गए वहीं जर्जर धर्मशाला में एक करोड़ खर्चकर बजरी और सीमेंट से लीपापोती की जा रहा है। जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार धर्मशाला २०० वर्ष से अधिक पुरानी होकर चूना पत्थर से बनी है, और पूरा भवन टपकता है। ऐसे में लोग इस राशि को फिजूल में खर्च करना मान रहे हैं।
जर्जर भवन, पानी है न शौचालय
चारभुजा के बस स्टैंड पर बनी वर्षों पुरानी धर्मशाला जर्जर है। चूना पत्थर से बनी इस इमारत में करीब ६५ कमरे बने हुए हैं। इसकी छत पट्टियों से पटी हुई है तथा सभी पट्टियों के मध्य पानी टपकने से काफी दरारें आ गई हैं। इससे छत कमजोर होने की संभावना है, और वर्षों पुरानी पट्टियां भी टूट सकती है। भवन की दीवारों पर सीलन होने से वह भी कमजोर दिखाई दे रही है।
उपयोगहीन हैं कमरे
बताया जाता है कि बस स्टैंड क्षेत्र में बनी इस धर्मशाला का निर्माण रियासतकाल में महाराजा ने अपने ठहराव के लिए करवाया था, लेकिन फिर उन्होंने इसे मंदिर के लिए दान कर दी। इसलिए उन्होंने इसमें जो कमरे बनवाए थे वह सैनिकों के ठहराव के हिसाब से छोटे-छोटे बनवाए थे। करीब आठ बाय आठ वर्ग फीट के बने इन कमरों में शौचालय और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे लोगों धर्मशाला के उपयोग में प्रश्न उठ रहे हैं। हालांकि धर्मशाला में सार्वजनिक सुलभ शौचालय प्रस्तावित है, लेकिन धर्मशाला के कमरों की संख्या को देखते हुए वह नकाफी साबित होंगे।
अनियमितता में दो अधिकारी हुए थे निलम्बित
चारभुजा गढ़बोर मंदिर विस्तार योजना में 5 करोड़ 80 लाख रुपए के काम स्वीकृत हैं। आरएसआरडीसी युनिट द्वारा ठेंकेदार को नक्शा बनाकर दिया गया। फिर भी नक्शे के अनुरूप कार्य नहीं होने व शिकायत होने पर 30 मई को उदयपुर से आई टीम ने इसकी जांच की और अनियमितता के चलते अधिशासी अभियन्ता आरसी बलाई व कनिष्ठ अभियंता विशाल कुमार को निलम्बित कर दिया। नक्शे के अनुसार दूधतलाई पर 75 लाख रुपए की लागत से परिक्रमा के चारों ओर सीसी रोड, पालकी सीढिय़ों पर तीन तीन फीट मार्बल लगाना। तलाई के पेंदे से पानी के रिसाव को रोकने के लिए नीचे से नींव के साथ दीवार उठानी थी, दर्शकों के लिए पहाड़ी की कटाई कर दर्शक दीर्घा बनानी थी। तलाई के चारों ओर शिवलिंग लगाने थे और दो शुलभ कॉम्पलेक्श बनने थे, लेकिन यहां महज तलाई में सीढियों का काम तथा शौचालय का निर्माण ही होकर काम बंद कर दिया गया। तलाई के पेंदे में पानी ठहराव तक के इंतजाम नहीं किए गए।
व्यर्थ लगा रहे राशि...
धर्मशाला २०० वर्ष से अधिक पुरानी है, इसके पूरे कमरे जर्जर हैं। मंदिर विस्तार योजना के तहत इसमें एक करोड़ रुपए खर्च करना, रुपए पानी में डालने के बराबर है। इसमें पानी की व्यवस्था है, न शौचालय की। छोटे-छोटे कमरे बने हैं, बस एक आदमी ही एक कमरे में ठहर सकता है।
-गोपाल गुर्जर, स्थानीय निवासी
नई बननी चाहिए थी...
बस स्टैंड के पास बनी धर्मशाला जर्जर होकर काफी पुरानी है, इसमें पैसे लगाने की जगह, इसे गिराकर यहां नई धर्मशाला बनवाई जाती तो उसका लोगों को फायदा भी मिलता। मंदिर विस्तार योजना के सारे काम ऐसे ही हो रहे हैं। दूध तलाई में भी निर्माण कार्य में काफी अनियमितता सामने आई हैं, जिसमें कई अधिकारी निलम्बित भी हुए थे। अब काम बीच में ही बंद कर दिया गया है।
हीरालाल गुर्जर, पूर्व उपसरपंच, चारभुजा
Published on:
01 Aug 2018 12:34 pm
