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आखिर रकमगढ़ में भी गाया गया राष्ट्रगान

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रकमगढ़ छापर के बलिदान की ताजा की यादें, स्थानीय निवासियों ने प्रतिवर्ष १४ अगस्त को शहादत को सलाम करने की ली शपथ
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आखिर रकमगढ़ में भी गाया गया राष्ट्रगान

राजसमंद. भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख सेनानायक कहे जाने वाले तात्या टोपे व अंग्रेजी सेना के मध्य हुई मुठभेड़ के गवाह रकमगढ़ परिसर में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शहीदों को नमन कर राष्ट्रगान गाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों के साथ ही मुख्यालय से समाजसेवियों ने भाग लिया। प्रतिवर्ष १४ अगस्त को यहां इसीतरह आयोजन करने की शपथ भी ली। राजस्थान पत्रिका ने ‘भूले शहीदों का बलिदान’अभियान के तहत १२ अगस्त को ‘आजादी के बलिदान का गवाह है रकमगढ़ का छापर’, १३ अगस्त को ‘रकमगढ़ में स्मारक बनाने के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में’, १४ अगस्त को ‘रकमगढ़ बना, मनचलों और समाज कंटकों का अड्डा’ खबरें प्रकाशित कर रकमगढ़ छापर से जुड़ा शहीदों का इतिहास, गढ़ का इतिहास तथा जर्जर हो रहे गढ़ की खबरें प्रकाशित की। पत्रिका से प्रेरणा लेते हुए स्थानीय निवासियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों ने स्वतंत्रता के बलिदान हुए शहीदों की याद में रकमगढ़ पर एक सादगी भरा कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में राष्ट्रगान के साथ ही शिक्षाविद दिनेश श्रीमाली ने रकमगढ़ तथा छापर के इतिहास के बारे में जानकारी दी।


खेतों से निकली थी हड्डियां व तलवारें
श्रीमाली ने बताया कि मुठभेड़ के वर्षों बाद छापर पर जब खेती शुरू की गई तो किसानों को यहां से हड्डियों के अवशेष, जंग लगी तलवारें, कटारें, भाले आदि के टुकड़े भी मिले। जो इस छापर की शहादत को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने अंग्रेजी सेना द्वारा घेरे गए तात्या टोपे व कोठारिया रियासत के रावत जोधसिंह चौहान द्वारा की गई मदद की जानकारी दी।


प्रतिवर्ष कार्यक्रम करवाने की ली शपथ
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय निवासियों सहित समाजसेवियों ने 14 अगस्त को यहां शहीदों की याद में प्रतिवर्ष आयोजन करने की शपथ ली। साथ ही स्थानीय सरपंच अशोक जोशी ने गढ़ का स्वामित्व रखने वालों से बातकर इसकी मरम्मत आदि करवाने पर भी चर्चा की।


इनकी रही मौजूदगी
कार्यक्रम में श्रीमाली व सरपंच के साथ ही स्थानीय समाज सेवी किशन गाडरी, वार्डपंच भंवरलाल कुमावत, तुलसीराम गाडरी, संतो, वरदी, मोहनी, काली, कन्नी बाई,कंकूबाई रेगर, भूरी गाडरी, प्रकाशमाली तथा समाज सेवी भगवत शर्मा, नारायणसिंह राव, दिलीप जोशी, राजकुमार बागोरा, एसएल भाटी, दर्शन पालीवाल, हेमेंद्रसिंह चौहान, गणपतसिंह ढुलावत सहित करीब पांच दर्जन लोग मौजूद थे।


गढ़ को देखा
कार्यक्रम के दौरान यहां सरपंच, वार्डपंच ने गढ़ की क्षतिग्रस्त दीवारें, छत आदि का निरीक्षण किया तथा इसके उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही।


रकमगढ़ छापर से जुड़ा संक्षिप्त इतिहास
तात्या टोपे को अंग्रेजी सेना ने रकमगढ़ के छापर पर घेर लिया था। इस पर १३ अगस्त १८५८ में इस छापर पर तात्या और अंंग्रेजों के मध्य मुठभेड़ हुई। जिसमें हमारे दर्जनों देशभक्त शहीद हो गए थे। तात्या को बचाने के लिए रावत जोधसिंह चौहान ने अपनी सेना भेजी थी, सेना की मदद के चलते तात्या अंग्रेजों को चकमा देकर यहां से निकलने में कामयाब हो गए थे।