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जिस स्कूल में पढ़े, उसका करवा रहे कायाकल्प

भामाशाह सोहनलाल धाकड़ पांच करोड़ की लागत से बनवा रहे शिशोदा के राउमावि की नई इमारत
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जिस स्कूल में पढ़े, उसका करवा रहे कायाकल्प

राजसमंद. बचपन की यादें व्यक्ति के जीवन में अलग ही छाप छोड़ती हैं। उन दिनों के सुख और दुख, दोस्तों के साथ हंसी ठिठोली अतीत बनकर वर्तमान में झांकता रहता हैं। यादों के झरोखे में सबसे अहम विद्यालय की गुदगुदाती तस्वीरें होती है, जो व्यक्ति को जीवन पर्यंत अपनी माटी से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाती हैं, ऐसी ही यादों के वशीभूत हुए हैं शिशोदा के भामाशाह सोहनलाल धाकड़, वह जिस विद्यालय में पढ़े थे आज वहां बच्चों के बैठने की समस्या को देखकर उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने विद्यालय के लिए नई इमारत बनाने का निश्चय किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने भी इसके लिए प्रोत्साहित किया तो उन्होंने कागजी खानापूर्ति कर पांच करोड़ रुपए से इमारत बनवाने की घोषणा कर दी, बल्कि खुद की कंस्ट्रेक्शन कम्पनी होने के कारण उन्होंने प्रधानाचार्य से भवन कमरों आदि की आवश्यकता की जानकारी जुटाकर खुद ही इस इमारत का काम शुरू करवा दिया है। वर्तमान में पहाड़ी काटकर समतल करने का काम चल रहा है। बताया जाता है कि भवन का काम एक साल के अंदर पूरा हो जाएगा।

35 कमरे और 8 प्रयोगशालाएं होंगी
राउमावि शिशोदा में बनने वाली नई ईमारत तीन माहले की होगी। जिसमें कुछ ३५ कमरे बनाए जाएंगे। इमारत ‘वी’ आकार में ढाली जाएगी। इसमें ३ विज्ञान, १ भूगोल, २ कम्प्यूटर तथा अन्य प्रयोगशालाएं बनेंगी। एक बैठक हॉल तथा एक प्रार्थना हॉल बनाया जाएगा। पूरा निर्माण कार्य ४० वाय २२० वर्ग फीट पर होगा।


50 बच्चों को हर वर्ष लेते हैं गोद
भामाशाह धाकड़ प्रतिवर्ष इस विद्यालय के ५० बच्चों को गोद लेते हैं तथा उनके पढऩे-लिखने की पूरी सामग्री भेंट करते हैं। साथ ही ड्रेस भी देते हैं।


वर्तमान स्कूल की स्थिति
स्कूल कक्षा १ से लेकर १२वीं तक चलता है। इसमें ५०५ बच्चों से अधिक का नामांकन है। स्कूल में महज १० कमरे होने से बच्चों को ठूंस कर बैठाना पड़ता है। एक-एक कमरें में तीन-तीन कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है। पत्रिका टीम ने जब स्कूल का निरीक्षण किया तब भी प्रधानाचार्य के कक्ष में ११वीं कक्षा चल रही थी। अन्य कक्षाओं में आवश्यकता से कहीं अधिक बच्चे बैठे थे।

खुद बनावा रहे हैं...
धाकड़ इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं। विद्यार्थियों को समस्या थी इसलिए मैंने भी उन्हें भवन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि उनका शुुरू से ही इस विद्यालय के प्रति जुड़ाव रहा है। वह प्रतिवर्ष इस स्कूल के कुछ बच्चों को गोद लेते आए हैं। खुद की कंस्ट्रेक्शन कम्पनी होने के कारण विद्यालय भवन का काम वह स्वयं करवा रहे हैं।
कौशलेंद्र गोस्वामी, प्रधानाचार्य, राउमावि शिशोदा, राजसमंद


कहा है पैसे की कमी नहीं आएगी...
धाकड़ ने पांच करोड़ रुपए लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि आप तो जरूरत बताते जाएं, पैसे की चिंता नहीं करें, इससे ज्यादा राशि लगेगी तो वह भी लगाई जाएगी।
-भरत कुमार जोशी, जिला शिक्षाधिकारी (माध्यमिक), राजसमंद