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कैनवास पर कूंची चलाकर संस्कार बांट रहे हैं रंगकर्मी संत शरणमुनी निर्बाण

अब तक महापुरुषों के करीब 5 हजार चित्र बनाकर स्कूलों में भेंट किए : चार फीट ऊंचे, सोलह फीट लम्बे कैनवास पर उकेरा ऐतिहासिक दुर्ग का चित्र

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कैनवास पर कूंची चलाकर संस्कार बांट रहे हैं रंगकर्मी संत शरणमुनी निर्बाण

ओमप्रकाश शर्मा @ कुंभलगढ़

संत-महात्मा पुरातन काल से ही मानव समाज के आदर्श रहे हैं। इनकी प्रेरणा से ही भारत ने विश्व गुरुका दर्जा प्राप्त किया था। वर्तमान में भी एक संत ऐसे हंै, जो अपने हाथों से महापुरुषों एवं ऐतिहासिक स्मारकों की कलाकृतियां उकेरकर समाज भावी पीढ़ी को संस्कार बांटने के अनूठे अभियान में लगे हैं। इस अभियान को हर कोई सराह रहा है। केलवाड़ा कस्बे के सुन्दरवास स्थित गोपेश्वर महादेव मठ पर अल्प समय के लिए विराजित संत शरणमुनी निर्बाण (उदासीन) हरिओम बाबा ने पिछले एक माह से भी कम समय में चार फीट ऊंची एवं सोलह फीट लम्बी ऐतिहासिक दुर्ग कुंभलगढ़ की केनवास पर ऐसी नयनाभिराम तस्वीर उकेरी है, जो देखते ही बनती है। इससे पूर्व उन्होंने यहां बाबा परशुराम महादेव एवं महाराणा प्रताप के अलावा दुर्ग की तस्वीरें बनाकर भेंट की है।

भगवान की देन
शनिवार को पत्रिका से विशेष भेंट में बाबा ने बताया कि राजस्थान के जोधपुर जिले से मात्र पांच वर्ष की आयु के बाद से ही संत जीवन में प्रवेश करने वाले बाबा को चित्रकला भगवनान की देन के रूप में प्राप्त हुई। बाबा ने अपने गुरु के संग दीक्षा प्राप्त कर समाज की भावी पीढ़ी को समाज में आदर्श स्थापित करने वाले महापुरुषों के संस्कारों को अपनी कलाकृतियों के माध्यम से बांटनें का निश्चय किया। उन्होंने अपने ७० वर्ष के जीवन काल में प्रभुभक्ति के साथ-साथ महापुरुषों की लगभग पांच हजार कलाकृतियांं बनाकर विद्यालयों में भेंट कर चुके हैं।

विदेशों में बजा डंका
बाबा की मनमोहक चित्रकारी ने भारत देश ही नहीं वरन् अमेरिका के न्यूयार्क में भी अपनी छाप छोड़ी है। उनकी उत्कृष्ठ चित्रकारी के लिए सन् १९७३ में तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जेलङ्क्षसह की ओर से राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत किया गया था। वहीं, सन् १९७४ में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की ओर से भी पुरुस्कृत किया गया था। साथ ही सन् १९७४ में ही बाबा ने भारत सरकार के खर्चे पर न्यूयार्क में आयोजित इण्डियन फेस्टीवल में भारतीय संस्कृति की अद्भुत कला एवं चित्रकारी का प्रदर्शन करके भी वाहवाही प्राप्त की।

सुधारना चाहते माहौल
बाबा ने दुखी होकर कहा कि केलवाड़ा के इस गोपेश्वर महादेव मन्दिर पर महिलाएं एवं आम लोग इसलिए नहीं आते, क्योंकि यहां दिन भर रास्ते में शराबियों का डेरा रहता है। वहीं, आश्रम पर भी कुछ असामाजिक तत्व नशा करने के लिए चले आते हैं। टोकने पर अभद्रता करते हैं। उन्होने केलवाड़ा पुलिस स्टेशन एवं जन प्रतिनिधि अल्पेश असावा से भी शिकायत की है।

समस्या शीघ्र समाधान
आज से ही जब भी जाप्ता कस्बे में जाएगा तो एक चक्कर गोपेश्वर महादेव का भी लगाया जाएगा। समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
लक्षमणङ्क्षसह, हेड कांस्टेबल, थाना केलवाड़ा