
saint meera law college students visit to Rajsamand jail
राजसमंद। क्या बंदी जेल में पूजा कर सकते हैं?, दिन में कितनी बार बंदियों को पीटते हैं और कब तक? क्या जेल में बंदियों से काम करवाया जाता है?, क्या बंदियों को पूरा खाना मिलता है?, बंदी के बीमार होने पर इलाज करवाते हैं?, डे्रस कोड होने के बाद भी बंदियों ने सामान्य कपड़े क्यों पहन रखें है?, बंदी से उनके परिजन-मित्र रोज क्यों नहीं मिल सकते है? ....कुछ ऐसे ही सवाल लॉ कॉलेज की छात्राओं ने किए, तो एक बारगी जेल अधीक्षक शिवेंद्र कुमार भी असहज हो गए। फिर एक एक सवाल के जवाब देते गए, मगर छात्राएं एक के बाद एक प्रश्न दागती रही।
सेंट मीरा लॉ कॉलेज की छात्राओं ने गुरुवार दोपहर जिला कारागृह का अवलोकन किया। छात्राओं ने जेल में प्रवेश करते ही सवाल शुरू कर दिए। छात्राओं ने जेल में मंदिर में क्यों है ?, क्या बंदी पूजा भी कर सकते हैं?, जेल में कितने बंदी है?, क्या क्षमता है ?, क्या बंदी त्यौहार पर घर जा सकते हैं ?, कब तक जेल में रख सकते हैं? सरीखे कई सवाल कर दिए। जवाब में जेल अधीक्षक बोले कि जेल में बंदियों की जीवनशैली सामान्य ही है। वे सिर्फ बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं। राजसमंद में छोटी जेल है, जहां सिर्फ ट्रायल केस के बंदियों को रखा हुआ है और सजा भुगतने वाले सभी बंदियों को उदयपुर रेफर कर दिया जाता है।
बड़ी जेलों में बंदियों के काम करने के साथ खेलकूद व्यवस्थाएं भी रहती है। काम करने वाले बंदी को वेतन भी मिलता है। बंदियों की स्वास्थ्य जांच के लिए चिकित्सक व कम्पाउंडर आते हैं और दवा देकर जाते हैं। गंभीर बीमार होने पर उसे अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करते हैं। ट्रायल मामले में जमानत पर घर जा सकता है, जबकि सजा काटने वाले बंदी को पैरोल अवकाश का प्रावधान है। बंदियों से भी किए सवाल कारागृह की बैरक में खड़े एक बंदी से सवाल किया कि आपने क्या गुनाह किया, जिसकी वजह से जेल आना पड़ा। जवाब दिया, मैंने लूट की। तपाक से छात्राएं बोली- लूट क्यों की? क्या अब दोबारा ऐसी वारदात को अंजाम दोगे? कुछ देर रूककर बंदी बोला- नहीं, मैं ऐसा नहीं करुंगा, मुझे जमानत दिलवा दो।
Published on:
11 Oct 2018 05:16 pm
