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गांवगुड़ा पंचायत में सरपंच-सचिव हुए आमने-सामने

सचिव का प्रत्यारोप- चरागाह में दुकानें बनाई, एनओसी मांग रहे, कैसे दूं?
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गांवगुड़ा पंचायत में सरपंच-सचिव हुए आमने-सामने

गांवगुड़ा पंचायत में सरपंच-सचिव हुए आमने-सामने

खमनोर. ब्लॉक की गांवगुड़ा ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव (ग्राम विकास अधिकारी) आपसी खींचतान को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। दोनों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरपंच का आरोप है कि सचिव पंचायत सिर्फ एक व्यक्ति के इशारे पर चला रहे हैं। वे वार्ड पंचों और सरपंच की नहीं सुनते हैं। कोरम की बैठक कराने की बात पर पल्ला झाड़ लेते हैं। आरोप लगाने वाले सरपंच ने ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) पर शिकायत भी दर्ज करा दी।
उधर, सचिव ने भी सरपंच के आरोपों पर प्रत्यारोप लगाए हैं। ग्राम सचिव का कहना है कि सरपंच ने चरागाह में दुकानें बनाई और वे दुकानों के संबंध में एनओसी मांग रहे हैं। नियमों से ऐसा ये नहीं किया जा सकता है तो मैं एनओसी कैसे दूं? सरपंच किशनलाल गमेती और सचिव जितेंद्र तिवारी की आपस में ठन गई है। दोनों एक-दूजे पर आरोप लगा रहे हैं और तर्क गिना रहे हैं। हालांकि सरपंच ने शिकायत रजिस्टर्ड भी करा दी है। सचिव ने जवाब में प्रत्यारोप लगाए हैं और नियम से चलने की बात कही है।

सरपंच का आरोप- सचिव किसी और के इशारे पर चलते, मेरी नहीं सुनते
सचिव हमारी नहीं सुनते हैं। काम में अपनी मनमर्जी करते हैं। गांव के एक व्यक्ति इशारे पर चलते हैं। न वार्ड पंच को, न मुझे पूछते हैं। कोरम कराने की बात पर बोलते हैं कि सरपंच का काम है, वह खुद फोन करें। 5 और 20 तारीख को कोरम कराने पर कहते हैं कि ये मेरा काम नहीं है। सचिव ने लोगों को गुमराह कर रखा है। लोगों के पट्टे बनाने के लिए कहा जाता है तो 10 पट्टों से ज्यादा नहीं बनाने के नियम की बात करते हैं। जहां तक जानकारी है, नियमों की ऐसी कोईबंदिश नहीं है। लोग छह महीने से फाइलें लेकर भटक रहे हैं। पंचायत से खरीदा लेपटॉप अपने घर ले जाकर रख दिया। पूछने पर कहते कि यह मेरा है और पंचायत का काम घर से ही करता हूं, इसलिए घर पर ही रखूंगा। वार्ड पंचों के साथ मैंने भी पंचायत का बहिष्कार कर रखा है। सचिव को नहीं हटाया जाएगा तो प्रशासन गांवों के संग शिविर में कोई भी वार्ड पंच व सरपंच नहीं जाएगा। सरपंच मैं हूं और एक ही व्यक्ति की सुनेंगे तो मेरे होने का मतलब ही क्या। सचिव मुझे कहते हैं कि तुम नियम क्या जानते हो, जबकि मैं बीए पास हूं और मैं खुद नियम पढ़ रहा हूं और इसकी तैयारी भी कर रहा हूं। मेरे कुछ भी कहने पर सचिव एक-दूसरे को मेरे खिलाफ भड़काते हैं। मैंने सरकार के 18 1 पोर्टल पर भी शिकायत कर रखी है। बीडीओ-प्रधान को भी बोला है, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। जनता के काम नहीं होंगे और दूसरों के इशारों पर चलेंगे तो कैसे काम चलेगा।