
पता है यहां है खतरा, फिर भी बैठना पड़ता है रोजी कमाने
चारभुजा. धर्मनगरी में करीब 45 वर्ष पुरानी देवस्थान विभाग की धर्मशाला देखरेख के अभाव में काफी जर्जर हो रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा दिक्कत धर्मशाला परिसर में बनी दुकानों में व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को हो रही है। वे जोखिम उठाकर भी रोजी कमाने को मजबूर हो रहे हैं।
देवस्थान विभाग द्वारा पिछले कई सालों से धर्मशाला के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिससे धर्मशाला का पूरा परिसर ही जर्जर हो चुका है। ऐसे में इसके बाहरी ओर बनी दुकानों की हालत भी काफी खराब है। इसमें बारिश के मौसम में तो पानी टपकता है, जिससे हमेशा खतरा बना रहता है। विभाग द्वारा दुकानों का किराया जो वसूला जा रहा है, लेकिन इनके रखरखाव पर उसका ध्यान नहीं है। ऐसे में बारिश के दौर में तो पानी टपकने से सामान खराब होने के कारण व्यवसाईयों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। व्यवसाइयों द्वारा पिछले चार-पांच माह से लगातार की जा रही शिकायत के बाद अािखरकार विभाग की नींद खुली और धर्मशाला व दुकानों की मरम्मत के लिए करीब 4 माह पूर्व 10 लाख रुपए स्वीकृत किए और कार्य का ठेका भी दे दिया गया। इसके साथ ही ठेकेदार को काम जल्द करवाने के आदेश दिए थे, लेकिन मरम्मत का कार्य ठेकेदार द्वारा अब तक शुरू नहीं किया गया है। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
पानी की टंकी से रिसाव
धर्मशाला में बनी पानी की टंकी भी पूरी तरह से जर्जर होने से उसमें भरा पानी छतों पर फैल जाता है, जो दुकानों में आने से व्यापारियों को सामान रखने में दिक्कत हो रही है।
समाजसेवी ने की थी दान
यह धर्मशाला मारवाड़ के समाजसेवी द्वारा देवस्थान विभाग को भेंट की गई थी। इसमें 16 कमरे बने हुए हैं और शौचालय आदि की सुविधा भी है। इसमें अलग से विभाग द्वारा कुछ भी कार्य नहीं करवाया गया। पूर्ण रूप से सुविधाजनक होने के बावजूद विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने से इसमें यात्री भी नहीं ठहरते। जबकि इस पर ध्यान दिया जाए तो यह यात्रियों के ठहरने के लिए काफी अच्छा स्थान है।
Published on:
24 Nov 2018 12:20 pm
