
Krashan Janmastmi 2025
नाथद्वारा. पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्रीनाथजी की हवेली में रविवार को नंद महोत्सव अपार भक्ति, उल्लास और वात्सल्य रस के संगम के साथ मनाया गया। जन्माष्टमी के अगले दिन आयोजित इस महोत्सव ने भक्तों को बृजधाम के अद्भुत नज़ारे का अनुभव करा दिया। जैसे ही प्रभु श्रीनाथजी और लाड़ले लाल नवनीत प्रियाजी पर दूध, दही और केसर की वर्षा हुई, पूरा वातावरण केसरिया आभा से सराबोर हो उठा। श्रद्धालु इस दिव्य वर्षा में भीगकर झूम उठे और हवेली में भक्ति-रस का अद्वितीय प्रवाह बह निकला।
सुबह परंपरागत छठी पूजन से नंद महोत्सव का शुभारंभ हुआ। परचारक विशाल बावा ने नन्हे कान्हा की मंगलमयी आयु की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद नवनीत प्रियाजी को स्वर्ण पलना में विराजमान कर झुलाया गया। इस अवसर पर बड़े मुखिया इंद्रवदन ने नंद बावा और घनश्याम सांचीहार ने यशोदा मैया का रूप धारण कर वात्सल्य भाव से प्रभु को झुलाया। प्रांगण में ग्वाल-बाल और गोपियों के वेश में सेवकों ने नृत्य प्रस्तुत कर भक्तों को बृजलीला का जीवंत अनुभव कराया। दूध-दही और केसर की वर्षा के बीच नृत्य-गान ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस दिन प्रभु श्रीनाथजी को भव्य तीहराश्रृंगार धराया गया। केसरिया चाकदार वस्त्र, श्रीमुख पर मोर चंद्रिका और स्वर्ण-रजत अलंकरण की छटा ने दर्शन को दिव्य बना दिया। विशाल बावा और श्रीलाल बावा ने प्रभु को स्वर्ण-रजत खिलौनों से लाड़ लड़ाया और आरती उतारी।इस अलौकिक श्रृंगार ने श्रद्धालुओं के हृदयों को आनंद और भक्ति से भर दिया।
पलना झुलाने के बाद परचारक विशाल बावा, नंद बावा रूप में इंद्रवदन को लेकर महाप्रभुजी की बैठक में गए। वहां गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम दृश्य सामने आया, जब विशाल बावा ने दंडवत कर आशीर्वाद लिया और इंद्रवदन ने भी गुरु स्वरूप बावा को प्रणाम कर आशीष प्रदान किया। यह भावनात्मक क्षण देखकर वैष्णवजन भाव-विभोर हो उठे।
विशाल बावा ने कहा, "नंद महोत्सव केवल परंपरा का पालन नहीं, बल्कि यह भक्ति, प्रेम और वात्सल्य का उत्सव है। इसमें ग्वाल-बाल का उल्लास, गोपियों की भक्ति और दूध-दही-केसर की वर्षा मिलकर प्रभु के साथ प्रेम का अद्भुत संगम रचते हैं।"
Updated on:
18 Aug 2025 12:11 pm
Published on:
18 Aug 2025 12:11 pm
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