
कुत्ता मंदिर और चबुतरे पर चढ़ सकता है, पर हम नहीं : सार्वजनिक कुंए और हैण्डपम्प से पानी नहीं भरने दिया जाता क्यों?
राजसमंद. भेदभाव को खत्म करने व अनुसूचित जाति समेत सात सुत्रीय मांगों को लेकर बागरिया समाज ने गुरूवार को रैली निकालकर जिलाकलक्टर आनंदी व पुलिस अधीक्षक मनोज चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने अपने दर्द का बंया करते हुए बताया कि समाज १९९४ में बागरी के अन्र्तगत अनुसूचित जाति में आता था। मगर, १९९४ के बाद समाज को बागरी से अलग मानकर अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचि चार में शामिल कर दिया गया। इसके बाद से इस जाति के लोगों के साथ अन्याय हो किया जा रहा है।
भेदभाव खत्म करने की मांग
बताया कि बागरिया समाज को शुरू से छुआछुत, भेदभाव, किया जाता रहा है। बताया कि समाज पुरे क्षेत्र में बिखरी आबादी में निवास करता है। २०-२५ वर्ष पूर्व यह समाज गांव में मरे हुए जानवर, कुत्ते, बिल्ली को डालने का कार्य करता था।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह काम नहीं करने पर गांव के अन्य समाज के लोगों द्वारा शोषण किया जाता है, इसे निजात
दिलाने की मांग की गई।
कुत्ता मंदिर पर चढ़ सकता है, पर ये समाज नहीं
समाज ने रैली निकालकर कलक्टर को सौंपे ज्ञापन में सात सुत्रीय मांगों को पुरी करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि समाज की मुख्य काम मांगकर खाना, गांव की चाकरी करना, समाज दलित ही नहीं महादलित में आता है। उन्होंने बताया कि हमारे समाज के साथ दुर्रव्यवहार किया जाता है। इस जाति के लोगों को मटके से, सार्वजनिक कुएं और हैण्डपम्प से पानी नहीं भरने दिया जाता है। यहां तक बताया कि हमारी जाति को कुत्ते से भी बत्तर बताया है। एक कुत्ता गांव के चबूतरे या मंदिर में जा सकते है, लेकिन बागरिया जाति के लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। साथ ही ब्याव, बिंदोली भी नहीं निकालने दी जाती है। अगर कोई बिंदोली निकालने की हिम्मत भी कर लेता है तो उसे गांव के लोगों प्रताडि़त करने पर उतारू हो जाते है।
सात सुत्रीय मांगों पर दिया शिक्षा पर जोर
समाज की ज्यादातर मांगों पर शिक्षा पर जोर दिया है। उन्होंने ० से १४ वर्ष के बालकों का सर्वे करवाकर, उन्हे शिक्षा से जोडऩे, पढऩे वाले बालकों को बागरी के नाम जाति प्रमाण-पत्र जारी करने, बने हुए मकानों के पट्टें आवंछित करने, १०-१२वीं पास लोगों को रोजगार दिलाने व बिजली, पानी, जमीन निशुल्क देने की मांग की।
Published on:
05 Jul 2018 04:44 pm
