
आखिर किस वजह से अलग हुए आध्यात्मिक गौमुख समिति और प्रजापिता ब्रहाकुमारी ईश्रीय विश्वविद्यालय, राजसमंद में ठहरे परिजनों ने खोले कई चौंकाने वाले राज
राजसमंद. अभिभावक दीपक डीडीलवा बोले कि आध्यात्मिक गौमुख समिति भी प्रजापिता ब्रहाकुमारी ईश्रीय विश्वविद्यालय से जुड़ी हुर्ई थी, जिससे ही अलग होकर नई संस्था बनी। दीपक का आरोप है कि मुख्य संस्था का ज्ञान व शिक्षा सीमित रह गई। क्योंकि वे पथभ्रष्ट हो गए। अभी हमारी संस्था से कम लोग जुड़े हैं, मगर अध्यात्म ज्ञान में उनसे कई आगे हैं। यह संस्था वर्ष 1976 में अलग हो गई। अनुयायी दयाराम कुमावत बोले कि ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा के लिए भी मैंने नि:शुल्क भवन दे रखा था। फिर भवन बना और नई जगह शिफ्ट हो गए। वे पथभ्रष्ट हो गए, तो मैं भी आध्यात्मिक गौमुख समिति से जुड़ गया और उसी के तहत मैंने यह भवन स्कूल संचालन के लिए उपलब्ध करवाया। यह कार्रवाई द्वेषता के चलते ही करवाई गई है।
अध्यात्म को समझना हर किसी के बस में नहीं है और न ही कोई समझ पाता। जो व्यक्ति श्रीमद् भगवत गीता पढ़ लेता है, वह कई हद तक अध्यात्म और ईश्वर ज्ञान को समझ पाता। हमारी बेटियां अध्यात्म को पढऩा चाहती है, जहां अध्यात्मिक शिक्षा में सनातन धर्म, नैतिक मूल्यों को बढ़ाना व आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। यहां बेटियां किसी के हाथ लगा खाना तक नहीं खाती और माता-पिता के अलावा किसी पुरुष या भाई तक से नजरें नहीं मिलाती। इतना परहेज रखते हैं हम। मगर यहां बाल कल्याण समिति की कार्रवाई ने हमारी बेटियों को सरेआम कर दिया। इससे उनकी ध्यान, भक्ति, अध्यात्म व शिक्षा ही भंग हो गई। हम चाहकर भी किसी को नहीं समझा सकते। क्योंकि किसी अध्यात्म व ईश्वरीय ज्ञान है ही नहीं। अगर हम बताएंगे भी, तो कोई सुनना भी पसंद नहीं करता और हमें ही सनकी व
मूर्ख तक की संज्ञा देकर धिक्कार देते हैं।
कुछ यही बात कलेक्ट्रेट किशोरियों के परिजनों ने राजस्थान पत्रिका के समक्ष व्यक्त की। बांदा (उत्तरप्रदेश) के शिवशंकर कुशवाहा ने बताया कि उनकी एक बेटी इस विद्यालय में अध्ययनरत है और उन्हें उस पर गर्व है। अभिभावक कोदरलाल बंजारे, संजय कुमार दीक्षित, मुकेश, कृष्णकुमार ने बताया उनकी बेटियां आध्यात्मिक गौमुख स्कूल में पढ़ रही है, जो जब भी घर आती है, तो उन्हें यहां के अनुकूल ही खान, पान, रहन सहन तक का पूरा ख्याल रखते हैं। ये न किसी रिश्तेदार के घर जाती है और न ही किसी पुरुष को उनके सामने आने व देखने तक की इजाजत है। यहां पर प्राचीन सभ्यता, वैदिक ज्ञान, श्रीमद् भगवद् गीता के साथ आधुनिक शिक्षा में गणित, भूगोल, इतिहास, नागरिक शास्त्र, अंगे्रजी, सामान्य ज्ञान, विज्ञान व चिकित्सा भी पढ़ाई जाती है।
अभिभावक बोले, हम भी विद्यार्थी
अभिभावक शिवशंकर कुशवाह बोले कि हमारी संस्था ऐसी है, जहां बाहरी व्यक्ति से कोई आर्थिक, सामाजिक के साथ किसी भी तरह की मदद नहीं लेते। हमारे परिवार में आध्यात्मिक ज्ञान से जो जुड़ा हुआ है, वही व्यक्ति स्वेच्छा से सेवा करके, दान करके या किसी भी तरह मदद कर सकता है। बच्चियों की पढ़ाई के साथ रहने, खाने, खेलने, मनोरंजन तक के सारे प्रबंध संस्था द्वारा ही वहन किए जाते हैं।
Published on:
07 Jul 2018 12:26 pm
