
घर बेचकर कराया इलाज, न पुलिस ने की मदद... न ठेकेदार ने ली सुध
राजसमंद. दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने वह मजदूरी करने गई और जिन्दगीभर का गम और शारीरिक अक्षमता लेकर घर लौटी। गलती भी उसकी नहीं थी, बस खतरा नहीं होने के भ्रम का शिकार हो गई। करंट ने उसे चपेट में ले लिया और एक हाथ खोना पड़ा।
यह वाकया ४० साल की महिला श्रमिक मिट्ठू बाईके साथ पेश आया, जो अब न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। राजनगर क्षेत्र के गायरियावास निवासी सोहनलाल गायरी की पत्नी गत १० जुलाई को राजनगर के पास निर्माणाधीन दुकानों की छत पर काम कर रही थी। कारीगर पूरण बैरवा और भगवतीलाल के अलावा वहां श्रमिक गणेशी बाई थी।
सुबह 11 बजे कारीगर ने मिट्ठू बाई को उसे प्लास्टर की पट्टी लाने के लिए कहा था, जो ऊपर से गुजरती ३३ केवी बिजली लाइन को छू गई, जिससे उसके शरीर में करंट दौड़ गया। करंट लगने से उसका बायां हाथ और पांव जल गया तथा शरीर का अन्य हिस्सा भी प्रभावित हुआ। महिला का आरोप है कि काम शुरू करने से पहले निर्माणकर्ता ने कहा था कि बिजली लाइन बंद है। इस भरोसे के साथ वह काम कर रही थी, जबकि लाइन में करंट प्रवाहित हो रहा था।
तीन बार ऑपरेशन, काटना पड़ा हाथ
महिला को निर्माणकर्ता ने तत्काल राजसमंद के ही एक निजी अस्पताल में भेज दिया, जहां से उसे उदयपुर रैफर करना पड़ा। वहां उसकी गम्भीर स्थिति को देखते हुए तीन ऑपरेशन करने पड़े, लेकिन कोई उम्मीद नहीं बचने से आखिरकार डॉक्टरों ने हाथ काटने का निर्णय लिया। उसका बांया हाथ अब नहीं है। पैर भी जलने के साथ ही रुग्ण हो गया है।
निर्माणकर्ता, पुलिस ने टरकाया
महिला का आरोप है कि 14 जुलाई को उसके जेठ काशीराम और तीन अगस्त को उसके पति सोहनलाल ने लिखित में रिपोर्ट दी, लेकिन पुलिस ने अब तक कोईकार्रवाई नहीं की है। उसने राजनीतिक रसूख के चलते कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया।
बेचना पड़ा घर
सोहनलाल ने बताया कि निर्माणकर्ता ने कोईमुआवजा नहीं दिया, न कोईमदद के लिए आगे आया। पहले ऑपरेशन के पैसे देने की बात कही, फिर दुकान मालिक ने इनकार कर दिया। ऐसे में उसने साढ़े चार लाख रुपए में घर बेचा और पूरा पैसा ऑपरेशन और इलाज में खर्च हो गया। निर्माणकर्ता पर आरोप लगाया कि उन्होंने सोहनी को घटना के बाद केवल अस्पताल तक भेजने का बंदोबस्त किया।
अवैध निर्माण, फिर भी सब मौन
बताया गया कि पूर्व पार्षद बद्रीलाल भोई की इन दुकानों का निर्माण पूरी तरह अवैध ढंग से हुआ, जिस पर नगर परिषद के अधिकारी भी मौन रहे। यही नहीं, विद्युत निगम तक ने बिजली लाइन शिफ्टिंग करवाए बगैर निर्माण करवाने पर नोटिस जारी किया था, जिस पर परिषद और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में यह हादसा हो गया।
Published on:
22 Sept 2018 12:25 pm
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