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राजसमन्द. विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी एकता परिषद एवं आदिवासी एकता संस्थान राजसमन्द की ओर से शुक्रवार को जिला मुख्यालय के समीप वांसोल गांव में प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक एवं आदिवासी समागम कार्यक्रम हजारों समाजजनों की उपस्थिति में आयोजित हुआ। ऐतिहासिक राजसमन्द झील किनारे वांसोल गांव स्थित सबरी मां भवन में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता आदिवासी एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मोगजी भाई भगोरा डूंगरपुर ने की। मुख्य अतिथि दादरा-नगर हवेली से आए परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मण्डल सदस्य व वरिष्ठ आदिवासी नेता प्रभु टोकिया थे। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय साहित्य अध्यक्ष मण्डल सदस्य डॉ. मानसिंह निनामा बांसवाड़ा, राष्ट्रीय अध्यक्ष मण्डल सदस्य साधना मीणा उदयपुर, जीवराज डामोर डूंगरपुर, प्रदेश महामंत्री शंकर कोटेड़ डूंगरपुर, प्रदेश कोषाध्यक्ष व पार्षद रामलाल मीणा, राजसमन्द जिलाध्यक्ष इन्द्रलाल गमेती, छात्रनेता कांतिलाल मइड़ा, संजय निनामा आदि थे।
अतिथियों ने वीर यौद्धाा राणा पूंजा व महान क्रांतिकारी बिरसा मुण्डा की छवि पर माल्यार्पण कर नमन किया। परिषद जिलाध्यक्ष इन्द्रलाल गमेती, युवा जिलाध्यक्ष वेणीराम गमेती, प्रदेश कोषाध्यक्ष रामलाल मीणा, उपाध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल भील, सलाहकार मंत्री श्यामलाल, रतनलाल, भंवरलाल खारण्डिया, मदनलाल, मुकेश मीणा, उषा गमेती, पिंकीदेवी, कर्मचारी प्रकोष्ठ के मूलचंद भैरूलाल, धन्नालाल आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। जिलाध्यक्ष गमेती ने कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की। वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय अध्यक्ष मण्डल सदस्य प्रभु टोकिया, डॉ. मानसिंह निनामा, साधना मीणा, प्रदेश अध्यक्ष मोगजी भाई आदि ने आदिवासी दिवस की महत्ता व उपादेयता समझाई।
समाज सम्बन्धी कई मुद्दों पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि यह समुदाय सदियों से प्रकृति व संस्कृति का संरक्षक, मानवीय मूल्यों व परम्पराओं का संवाहक रहा है। जिसका आधार जल, जंगल व जमीन है। उन्होंने कहा कि यदि सृष्टि एवं मानव को बचाना है तो आदिवासी जीवन शैली को अपनाना होगा। वक्ताओं ने मेवाड़ के आदिवासी समाज को टीएसपी जैसा लाभ देने या आरक्षण कोटे में विशेष दर्जा देने की मांग उठाई। संचालन परिषद सचिव प्रकाश गमेती व शंकर कोटेड़ ने किया।
कार्यक्रम स्थल पर सुबह से समाजजनों का आना शुरू हो गया था। जिला मुख्यालय व आसपास के गांवों के अलावा जिले के विभिन्न क्षेत्रों से वाहन रैलियों के साथ हजारों समाजजन पहुंचे। इन वाहनों पर बैनर लगे थे एवं पताकाएं फहरा रही थी वहीं लोग नारे लगा रहे थे। आदिवासी समाज के गुणगान में संगीत भी बज रहा था। आदिवासी समाजजन पारम्परिक वेशभूषा में पहुंचे। खास बात यह कि कई समाजजन आदिवासी संस्कृति से ओतप्रोत वेशभूषा में सजे होकर हाथों में तीर-कमान, गोफण जैसे पारम्परिक शस्त्र लिए हुए थे जो आकर्षकण रहा। राज्य के कई स्थानों से भी समाज प्रतिनिधि शिरकत करने आए। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी। आखरी चरण में आयोजन सम्बन्धी व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया।
Published on:
10 Aug 2024 11:27 am
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