
अण्डरपास की जगह बनाया नाला, गुमराह किया लोगों को, जान देकर चुका रहे किमत
राजसमंद. करोड़ों खर्च कर बनाए गए भीलवाड़ा-राजसमंद फोरलेन पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने ऐसी खामियां भी रखी हैं कि वह खुद अपने काम पर असमंजस में पड़ा हुआ है। ऐसा ही एक मामला मोही रेलवे स्टेशन क्रॉसिंग पर बनाए अण्डरपास का है।
फोरलेन पर इस क्रॉसिंग पर सुरक्षा उपायों के अभाव में आए-दिन बड़े हादसे होते हैं। सुरक्षा के लिहाज से क्रॉसिंग निर्माण के दौरान लोगों ने अण्डरब्रिज बनवाने की मांग की थी। आला अधिकारियों ने इस मांग को पूरा करने के लिए कागजी खानापूर्ति करते हुए अण्डरब्रिज बना दिया, लेकिन यह सिर्फ ग्रामीणों के साथ किया एक मजाक प्रतीत हो रहा है। असल में यह ब्रिज ही नहीं है। केवल नाले का रूप दिया गया है, जिसमें बारिश के दिनों में पानी भरा रहता है। इसकी चौड़ाई भी इतनी सी हैकि एक ओर से मोटर साइकिल गुजर सकती है। सामने से एक और बाइक आ जाए, तो पार नहीं किया जा सकता है। यह नालानुमा अण्डरपास अन्दर से काफी संकड़ा है। बारिश के दिनों में पानी भरा रहता है। अण्डरपास के एक मुहाने पर आधी जर्जर सडक़ बनी हुई है, लेकिन आगे जाने का मार्गही नहीं है। इसमें लाइट की सुविधा नहीं होने से रात्रि में अण्डरपास से निकलना जोखिमभरा है।
मामले से अज्ञात, सबसे बड़ी लापरवाही
पत्रिका टीम जब मौक पर पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने इसे अण्डरपास होना बताया। पूर्व में निर्माण के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से लोगों ने फोरलेन पर सुरक्षा मार्ग और ब्रिज बनाने की मांग की थी। जिम्मेदारों ने उनकी मांग पर
एक अण्डरपास बना दिया, जो पहली ही नजर में नाले सा नजर आता है।
लोगों ने जान देकर चुकाई कीमत
जिम्मेदारों की लापरवाही की कीमत लोगों ने जान देकर चुकाई है। यहां कईहादसे हो चुके हैं। रात व दिन में सडक़ पार करते समय लोग बड़े वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। सहूलियतभरा अण्डरपास बनने पर कई जानें बच सकती थीं। लोगों को ब्रिज नहीं बनने का मलाल है।
यातायात का दबाव ज्यादा
मोही रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात का भारी दबाव है। भीलवाड़ा से राजसमंद व उदयपुर, नाथद्वारा से राजसमंद व भीलवाड़ा के लिए हजारों बड़े-छोटे वाहनों की आवाजाही होती है। इधर, राजसमंद से मोही, पीपली, कुंवारिया, कुरज, राज्यावास से आगे फतहनगर व रेलमगरा तक वाहन क्रॉस होकर जाते हैं। ऐसे में अत्यधिक यातायात दबाव होने से हादसे भी काफी होते हैं।
अधिकारी खुद ही गफलत में कि
क्या बना दिया?
चांैकाने वाली बात यह कि वहां लोगों को ही नहीं, बल्कि प्रशासन से लेकर निर्माण एजेंसी के आला अधिकारियों को भी जानकारी नहीं है कि यह नाला बनाया गया है या अण्डरपास। किस उद्देश्य से यह निर्माण किया, इसे लेकर अधिकारी जवाब देने की स्थिति में नहीं है। अगर कागजों में यहां अण्डरपास बनाया जाना था, तो इसे नाले का रूप कैसे दे दिया? क्या नक्शे के साथ छेड़छाड़ की गई?
कार्रवाई करवाता हूं
&सद्भाव कम्पनी से बात करके मैं पता करवाता हूं। अगर ऐसा है, तो ब्रिज का संचालन जल्द शुरू कर दिया जाएगा। बृजमोहन बैरवा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, राजसमंद
रिकॉर्ड देखकर बता पाऊंगा
&एवहां की क्या स्थति है, मुझे पता नहीं है। रिकॉर्ड में देखकर ही बता सकूंगा।
अरविंद सिंह,
प्रबंधक, सद्भाव टोल प्लाजा
Updated on:
29 Jun 2018 12:40 pm
Published on:
29 Jun 2018 11:59 am
