
आजम खान की बढ़ी मुश्किलें | Image - FB/@AbdullahAzamKhan
UP Politics: पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों के आंकड़े अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बनते जा रहे हैं। कुल 63 मुकदमों में घिरे आजम खां को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश मामलों में पीड़ित पक्ष मुस्लिम समुदाय से ही जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल इस मुद्दे को अलग-अलग तरीके से पेश करने की तैयारी में हैं।
फर्जी पासपोर्ट मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को अदालत द्वारा सात वर्ष की सजा सुनाई जा चुकी है। दोनों फिलहाल जिला कारागार में बंद हैं। अब तक उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों में अदालत के फैसले भी आ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लगभग 15 मामलों में निर्णय हो चुका है, जिनमें सात मामलों में सजा सुनाई गई, जबकि आठ मामलों में उन्हें राहत मिली है। बावजूद इसके, सपा में उनकी राजनीतिक हैसियत अभी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आजम खां के खिलाफ कुल 63 मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। इनमें से सात मामलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी अधिकांश मामलों में शिकायतकर्ता मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए जाते हैं। इन मुकदमों में जौहर विश्वविद्यालय के लिए कथित रूप से जमीन कब्जाने से लेकर यतीमखाना में रहने वाले परिवारों को हटाने जैसे आरोप शामिल रहे हैं। यही आंकड़े अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बनते जा रहे हैं और चुनावी माहौल में इस पर तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
राज्य में वर्ष 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद आजम खां के खिलाफ मुकदमों का सिलसिला तेज हुआ। पहला मामला सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया गया, जिसमें धमकाने और दंगा भड़काने के लिए उकसाने जैसे आरोप लगाए गए। इसके बाद अलग-अलग स्थानों से कई शिकायतें सामने आईं और धीरे-धीरे मामलों की संख्या बढ़ती चली गई।
वर्ष 2018 में मोहल्ला घेरबाज खां के निवासी आरिफ रजा खां ने घर में घुसकर मारपीट और बलवा करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद वर्ष 2019 में तो मामलों की संख्या अचानक तेजी से बढ़ गई। उस समय गंज, शहर कोतवाली और अजीमनगर क्षेत्रों से कई लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं, जिनमें बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की बताई गई।
इन मामलों में जमीन कब्जाने, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं से जुड़े आरोप शामिल रहे। वर्ष 2022 तक आते-आते मुकदमों की कुल संख्या 63 तक पहुंच गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मामलों के आंकड़े आगामी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
जन्म प्रमाणपत्र मामले में सजा के बाद आजम खां, उनकी पत्नी तंजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला आजम पर चुनाव लड़ने पर रोक लग चुकी है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के सामने नई रणनीति तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव में अब पार्टी को नए चेहरों को आगे लाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
इसी कड़ी में हाल ही में बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सागर को समाजवादी पार्टी में शामिल कर प्रदेश सचिव बनाया गया है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले संगठन में और भी बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि पार्टी क्षेत्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर सके।
समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष अजय सागर का कहना है कि अधिकांश मुकदमे दबाव में दर्ज कराए गए थे। उनका कहना है कि आजम खां केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि हर वर्ग के नेता रहे हैं। लगातार चुनाव जीतना इस बात का प्रमाण है कि जनता में उनका भरोसा कायम रहा है। उनके अनुसार चुनावी राजनीति का फैसला जनता ही करेगी।
वहीं भाजपा के जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को बिना डर अपनी बात कहने का अवसर मिला। उनका दावा है कि आजम खां के खिलाफ सामने आए मामलों में सबसे अधिक मुस्लिम समुदाय के लोग ही पीड़ित रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि उनकी सरकार का मूलमंत्र “सबका साथ, सबका विकास” है और कानून सभी के लिए समान है।
Published on:
12 Mar 2026 10:20 am
