
(रांची): झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में मंगलवार को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक समाप्त होने के बाद कैबिनेट सचिव एस.के.जी. रहाटे ने कहा कि बैठक में मुख्यमंत्री समेत उपस्थित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने अटलजी के निधन पर एक मिनट का मौन भी रखा और राज्य की सवा तीन करोड़ जनता की ओर से शोक प्रकट किया गया है। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री के जन्म से लेकर पत्रकारिता, राजनीति और सामाज सेवा के क्षेत्र में किये गए कार्यों का जिक्र किया गया।
शोक प्रस्ताव में कहा गया कि संसदीय परम्पराओं का जीवन भर पालन कर उन्होंने भारत के संसदीय लोकतंत्र को नए आयामों के साथ समृद्ध किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उनमें भारत का भविष्य देखा था। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए यह कहा था कि एक दिन वे भारत का नेतृत्व करेंगे। डॉ राम मनोहर लोहिया उनके हिन्दी प्रेम के प्रशंसक थे। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर उन्हें संसद में ‘गुरूदेव’ कहकर संबोधित करते थे। अटल बिहारी बाजपेयी को सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
शोक प्रस्ताव में यह भी कहा कि झारखण्ड उनका सदैव ऋणी रहेगा। 15 नवम्बर सन 2000 में झारखण्ड राज्य का गठन उन्हीं की देन थी। झारखण्ड राज्य के सृजनकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी का राज्य से काफी पुराना एवं गहरा रिश्ता रहा है। कई महत्वपूर्ण मौकों पर वे झारखण्ड आए और यहां के लोगों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी है। जनजातीय समाज को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा संवेदनशील रहे और उनके प्रधानमंत्रित्व काल में ही भारत सरकार में एक पृथक जनजातीय मंत्रालय का गठन किया गया था। संविधान के 8वीं अनुसूची में संथाल भाषा को सम्मिलित करने का श्रेय भी अटल बिहारी वाजपेयी को जाता है, जिसके लिए समस्त झारखण्डवासी उनके ऋणी हैं।
Published on:
21 Aug 2018 07:14 pm
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