
मॉब लिचिंग: झारखंड में 3 साल में 18 लोगों की मौत, बढ़ता जा रहा है भीड़तंत्र का ऐसा सलूक
( रांची, रवि सिन्हा )। मॉब लिंचिंग ( Mob lynching ) और उसमें एक समुदाय विशेष के लोगों के पीड़ित होने की बढ़ती घटनाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास नारे की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में झारखंड ( Jharkhand ) के सरायकेला-खरसावां जिले में मॉब लिचिंग की घटना में युवक की मौत के बाद राज्य की भाजपा सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास ( Raghuwar das ) ने सरायकेला-खरसावां जिले में मॉब लिचिंग की घटना में युवक की मौत को गंभीरता से लेते हुए मामले में जांच और दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई का आदेश दिया है। वहीं मॉब लिचिंग की घटना को लेकर अल्पसंख्यक आयोग ( Minorty Commission ) की टीम भी सरायकेला ( Sarayakela ) जाएगी।
आंकड़े भी देते हैं गवाही
आंकड़े भी इस बात का गवाह हैं कि झारखंड में पिछले तीन वर्षों में मॉब लिचिंग ( Mob Lynching ) की घटना में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 11 मुस्लिम, दो ईसाई और एक अनुसूचित जाति का युवक शामिल है, जबकि हिंदू समुदाय के चार लोग भी मॉब लिचिंग के भेंट चढ़ चुके हैं। इधर,राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को बदनाम करने का एक चलन सा शुरू हो गया है। कहीं कोई मामला होता है, तो उसके साथ इन संगठनों को जोड़ दिया जाता है। कहीं कोई किसी को मार दे, तो उसे मॉब लिंचिंग बताने का खेल शुरू हो जाता है।
मंत्री ने यूं किया बचाव
राज्य के मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि ‘कट एंड पेस्ट’ का जमाना चल रहा है। किसी वीडियो फुटेज के साथ कोई भी शब्द जोड़ा जा सकता है। इसलिए सोशल मीडिया में वायरल होने वाले हर वीडियो की सत्यता को जांचना एक बड़ी चुनौती है। वीडियो में जो कुछ भी कहा जा रहा है, वह उसी के शब्द हैं, कहना मुश्किल है। सरकार पूरे मामले की जांच कराएगी। जो भी दोषी होंगे, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। झारखंड सरकार किसी भी दोषी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। नगर विकास मंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं का राजनीतिकरण करने का जो ट्रेंड चला है, यह ठीक नहीं है। इधर जिले के पुलिस कप्तान कार्तिक एस ने कहा कि इस मामले में एक नामजद अभियुक्त पप्पू मंडल समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं अन्य आरोपियों को चिह्नित किया जा रहा है। मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। एसपी ने कहा कि इस मामले में किस पदाधिकारी ने कहां लापरवाही बरती है, इसकी भी जांच चल रही है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पत्नी ने दर्ज कराई प्राथमिकी
इस संबंध में मृतक तबरेज की पत्नी शाइस्ता परवीन ने कहा कि उसका पति तबरेज अंसारी 17 जून की रात को दो साथियों के साथ मोटरसाईकिल से जमशेदपुर के आजादनगर से लौट रहा था। धातकीडीह गांव के निकट पप्पू मंडल और अन्य ने चोरी के संदेह में उन्हें पकड़ लिया और खंभे से बांधकर पीटा। इस दौरान धार्मिक नारा ( Religious slogan ) लगाने के लिए मजबूर भी किया गया। लोगों की पिटाई से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में पुलिस ने चोरी के मामले में उन्हें जेल भेज दिया। दो दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार तबरेज पुणे में काम करता था, ईद की छुट्टी में अपने घर आया था। परिजनों ने तबरेज की बांध कर पिटाई करने का वीडियो भी पुलिस को सौंपा है। शाइस्ता ने इस मामले में पुलिस-प्रशासन की लापरवाही का भी आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
Published on:
24 Jun 2019 07:11 pm
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