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संशोधन बिल को वापस लेने की मांग को लेकर मानवश्रृखंला,बिल वापस न लेने तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी

झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हठ्धर्मिता छोड़कर सरकार से इस मामले पर संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की हैं...

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रवि सिन्हा की रिपोर्ट...

(रांची): राजधानी रांची में विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को वापस लेने की मांग को लेकर रविवार को मानव श्रृंखला बनाकर विरोध पदर्शन किया।


राजधानी रांची में कई ईसाई संगठनों की ओर से प्रदर्शन किया गया। कांटा टोली से कोकर, बहू बाजार, सुजाता चौक तक सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते दिखे। मानव श्रृंखला बनाकर उन्होंने अधिग्रहण बिल का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों कहा कि जब तक भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल वापस नहीं होता है, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है और गरीब आदिवासियों की जमीन को छीनकर कॉपरपोरेट घरानों को देना चाहती है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिल वापसी की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने राजभवन के समक्ष भी प्रदर्शन किया। राजभवन में ज्ञापन देकर राज्यपाल से अधिग्रहण बिल को वापस लेने की मांग की गई।

इधर, राज्य के प्रमुख विपक्षी दलों ने भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून के विरोध में कल 16 जुलाई को राजभवन के समक्ष धरना और प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी पार्टियां धरने में भाग लेंगी। विधानसभा में विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून में राज्य के जनजातियों और मूल निवासियों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा है कि स्थानीय लोगों को विकास के नाम पर जमीन से बेदखल किए जाने से लोगों में भारी निराशा
है।


उधर झारखंड विकास मोर्चा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हठ्धर्मिता छोड़कर सरकार से इस मामले पर संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा है कि राज्य के लोगों विशेषकर आदिवासियों और मूल निवासियों में इस कानून को लेकर गहरी चिंता है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता दीपक प्रकाश ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून से आदिवासियों के हितों की रक्षा होगी और संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास के लिए होगा।