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‘पहले पैसे दो फिर 108 एंबुलेंस से ले जाएंगे घर..’ पत्रिका की तत्परता से मरीज को वापस मिले पैसे

Ratlam News : कैमरे में कैद हुआ धमाकेदार स्टिंग- पैसे लिए बिना मरीज को लाते ले जाते नहीं 108 एंबुलेंस ड्राइवर। रतलाम मेडिकल कॉलेज के बाहर प्रसूता से 108 चालक ने घर छोड़ने के लिए 400 रुपए। निशुल्क सेवा पर मरीजों से अवैध वसूली! पीड़ितों का मददगार बना पत्रिका।

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Ratlam News

अस्पताल से घर जाने के लिए 108 एंबुलेंस चालक ने प्रसूता ले लिये पैसे (Photo Source- Video Screenshot)

Ratlam News :मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के हाल कितने बेहाल हैं, ये अब किसी से छिपे नहीं है। सरकार द्वारा मरीजों या मृतकों के लिए चलाई जा रही 108 एंबुलेंस या शांति वाहन व्यवस्था को जिम्मेदार किस तरह पलीता लगा रहे हैं। इसकी बानगी बयां करती तस्वीरें आए दिन सामने आती रहती हैं। ठेले पर शव या खटिया पर मरीज ले जाती तस्वीरें कई बार कार्यप्रणाली को शर्मसार कर चुकी हैं। हालांकि, इसके पीछे एंबुलेंस न होने या खराब होने की बात कहकर जिम्मेदार पलड़ा झाड़ लेते हैं। लेकिन, इस बार रतलाम मेडिकल कॉलेज के गेट से जो तस्वीरें सामने आईं हैं वो बेहद चौंकाने वाली हैं। यहां पत्रिका के कैमरे में जो कैद हुआ वो अबतक आपने नहीं सुना होगा, लेकिन आरोप है कि, जिले में धड़ल्ले से चल रहा है।

जिले में 108 एम्बुलेंस चालकों द्वारा मनमानी पूर्वक मरीजों से अवैध वसूली कर गनतव्य तक छोड़ने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इसकी बानगी बयां करता एक वीडियो पत्रिका के कैमरे में कैद भी हुआ है। हैरानी की बात ये है कि, ये मामला जिले के सबसे बड़े 'रतलाम मेडिकल कॉलेज' से सामने आया है। घटनाक्रम के साक्षी बने लोगों का कहना है कि, जब जिले के सबसे बड़े अस्पताल से जुड़ी व्यवस्थाओं के ये हालात हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सिविल या बीहड़ इलाकों में इस मूलभूत सेवा की हालत क्या होगी? लोगों का आरोप है कि, प्रशासन और जिला वाहन शाखा प्रभारी इस सेवा कार्य पर चालकों की इस मनमानी पर अंकुश लगाने में विफल हैं।

एंबुलेंस रुकवाई तो खुला राज

शिकायत सामने आने के बाद पत्रिका की टीम ने एक एंबुलेस चालक को मेडिकल कॉलेज के गेट पर रोका। चालक पर आरोप था कि, उसने सेलाना निवासी प्रसूता को अस्पताल से घर छोड़ने के लिए 400 रुपए की वसूली की है। इसपर पत्रिका की टीम ने चालक से अवैध वसूली के संबंध में सवाल किया तो उसने जवाब दिया कि, रकम मरीज के घर वालों ने उसे खुशी से दी है। हालांकि, दूसरी तरफ मरीज के परिजन ने आरोप लगाया कि, बिना पैसे लिए एंबुलेंस चालक घर ले जाने को तैयार ही नहीं था।

घर छोड़ने के लिए की 400 रुपए की डिमांड

प्रसूता के परिजन ने आरोप लगाया कि, 108 चालक ने उनसे प्रसूता और उसके नवजात को मेडिकल कॉलेज से सैलाना स्थित घर छोड़ने के एवज में 400 रूपए मांगे थे। वरना खुद को व्यस्त बताते हुए ना छोड़ पाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि, घर जाने के लिए 108 पर कॉल कर पंजीयन करा लिया था, बावजूद इसके एंबुलेंस चालक ने खुद को व्यस्त बताते हुए महिला और उसके नवजात को घर छोड़ने से इंकार कर दिया। पर जब महिला की नाजुक अवस्था के बारे में बताया गया तो चालक ने उनके सामने 400 रूपए की डिमांड करदी।

मेडिकल कॉलेज में हुई महिला की डिलीवरी

बताया जा रहा है कि, सैलाना निवासी गर्भवती महिला भारती पारगी को उनके पति दीपक 21 मई को डिलीवरी के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। यहां उसी दिन 21 महिला की डिलीवरी हुई। इसके बाद अस्पताल ने महिला और उसके नवजात को मॉनिटर करने के लिए भर्ती कर लिया और 25 मई को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। ऐसे में प्रसूता के पति दीपक ने 108 पर संपर्क कर एंबुलेंस रजिस्टर्ड की। रजिस्ट्रेशन के बाद एसएमएस के माध्यम से गाड़ी नंबर CG04 NW 6362 मौके से लेने पहुंचने की जानकारी दी गई। साथ ही, संपर्क के लिए चालक का नंबर भी दिया गया।

'पैसे दो वरना किसी अन्य निजी वाहन से घर जाओ'

एसएमएस के माध्यम से मिले नंबर पर चालक को कॉल किया गया तो चालक ने आधे घंटे में अस्पताल पहुंचने की बात कही। आरोप है कि, आधे घंटे बाद जब चालक मेडिकल कॉलेज पहुंचा तो उसने महिला को एंबुलेंस में बैठाने से पहले उसने 400 रुपए की मांग कर दी। इसपर प्रसूता ने कहा कि, सरकार की ओर से संचालित ये सेवा तो निशुल्क है। इसपर 108 चालक ने कहा कि, आप पैसे दोगे तभी आपको छोड़ पाएंगे, वरना अपने स्तर पर कोई निजी वाहन करलो। इसपर प्रसूता के पति ने 400 रुपए दिए, तब जाकर चालक उन्हें उनके घर छोड़ने को राजी हुआ।

पीड़ित को वापस दिलवाई गई अवैध वसूली की रकम

दीपक के अनुसार, उसने एंबुलेंस चालक को 100-100 के चार नोट दिए। सबूत के तौर पर उन नोटों के फोटो अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिए, ताकि समय पड़ने पर नंबरों का मिलान कर अपनी बात सिद्ध कर सके। इसके बाद दीपक ने इसकी जानकारी पत्रिका को दी। सूचना पर तुरंत पत्रिका की टीम मेडिकल कॉलेज के गेट पर पहुंची और एंबुलेंस रुकवाकर चालक से अवैध वसूली के संबंध में सवाल किया। चालक से पूछा गया कि, आखिर वो निशुल्क सेवा के एवज में पैसे कैसे मांग सकता है? दीपक के दावे और पत्रिका के कैमरे के सामने खुद को घिरते देख चालक ने जवाब दिया कि, उन्हें ये रकम खुशी से दी गई थी। इसपर प्रसूता के पति ने कहा कि, अगर रकम खुशी से दी जाती तो वो इसका विरोध क्यों करते। इसके बाद टीम ने चालक द्वारा लिए गए 100-100 के चार नोटों का मिलान कर वो राशि पीड़ित को वापस दिलवाई। साथ ही, चालक को उसके दायित्वों के बारे में बताकर सकुशल घर छोड़ने की अपील की।

बड़ा सवाल

फिलहाल, देखना ये है कि, क्या अब इस मामले पर जिम्मेदार कोई ठोस कदम उठाते हुए संबंधित 108 चालक के खिलाफ कार्रवाई करते हैं या फिर जिले में इसी तरह मरीज पैसे देकर निशुल्क सेवा का लाभ उठाने को मजबूर होते रहेंगे?