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आचार्यश्री नानेश संकल्पशील साधक थे- आचार्य प्रवर विजयराज महाराज

रतलाम। छोटूभाई की बगीची में सोमवार को आचार्यश्री नानेश का युवाचार्य चादर प्रदान दिवस श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक मनाया। इस मौके पर आचार्यश्री विजयराज महाराज ने गुणानुवाद करते हुए कहा कि आचार्यश्री नानेश कभी देह से सोते होंगे, लेकिन आत्मा से सदैव जागृत रहते थे। उन्होंने जीवन में कभी अजागृति का कोई कार्य नहीं किया। वे संकल्पशील साधक थे। हमारे जीवन में आचार्यश्री नानेश का अहम योगदान है। उनकी कृपा और उपकारों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता है।

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आचार्य प्रवर ने कहा कि शिष्ट बनकर आचार्यश्री नानेश विशिष्ट बने। अपने जीवनकाल में आचार्यश्री नानेश ने 350 दीक्षा दी। रतलाम में एक साथ 25 दीक्षा का प्रसंग अविस्मरणीय था। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनका वास्तविक गुणानुवाद है। शुरुआत में उपाध्याय प्रवर जितेशमुनि ने गुरु, देव और ब्रम्ह भक्ति पर प्रकाश डालते हुए आचार्यश्री नानेश का गुणानुवाद किया। महासती इन्दुप्रभाश्री ने 28 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकागण मौजूद रहे।

राष्ट्रीय स्वाध्याय दिवस मना
श्रीसंघ अध्यक्ष मोहनलाल पिरोदिया एवं मंत्री दिलीप मूणत ने बताया कि गुरु सप्ताह महोत्सव के अन्तर्गत गौशाला में गोसेवा की गई तथा सोमवार को राष्ट्रीय स्वाध्याय दिवस मनाया। 17 अक्टूबर को प्रेरणा की पहल का आयोजन होगा। आचार्यश्री के जन्म दिवस पर 18 अक्टूबर को गुरु सप्ताह का समापन सामायिक एवं एकाशना दिवस के रूप में समापन होगा। अभा साधुमार्गी शांतक्रांति जैन युवा संघ ने समाजजनों से अधिक से अधिक सहभागिता करने का आग्रह किया है।