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ठेकेदार फर्म ने दिखाया ठेंगा, प्रोजेक्ट हो गए लेट

शुरू होने से पहले ही विवादों में आने लगी पांचवीं-आठवीं की परीक्षा, 21 मार्च को दिया जाने वाला प्रोजेक्ट कार्य बच्चों को दिया 30 मार्च को

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रतलाम

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Kamal Singh

Mar 31, 2022

ठेकेदार फर्म ने दिखाया ठेंगा, प्रोजेक्ट हो गए लेट

ठेकेदार फर्म ने दिखाया ठेंगा, प्रोजेक्ट हो गए लेट

रतलाम. हाईस्कूल और हायर सेकंडरी बोर्ड की तर्ज पर कराई जा रही पांचवीं और आठवीं की वार्षिक परीक्षा शुरू होने से पहले ही विवादों में आ गई है। 21 मार्च को दोनों कक्षाओं के बच्चों को दिया जाने वाला प्रोजेक्ट नौ दिन बाद 30 मार्च को दिया गया है। दीगर बात यह है कि बच्चों की लिखित परीक्षाएं 1 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। ऐसे में बच्चे कब प्रोजेक्ट करके लाएंगे और कैसे परीक्षा की तैयारी करेंगे यह समझा जा सकता है।

हर विषय का है प्रोजेक्ट कार्य


पांचवीं और आठवीं कक्षा के हर विषय का प्रोजेक्ट कार्य परीक्षा में शामिल किया गया है। इसके अलावा परीक्षा लिखित में भी ली जा रही है। विभागीय जानकारों के अनुसार प्रोजेक्ट कार्य 40 अंकों का है और लिखित परीक्षा 60 अंकों की। इस तरह कुल 100 अंक प्रति विषय हैं। नौ दिन बाद प्रोजेक्ट कार्य मिलने से बच्चों के साथ ही शिक्षकों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।


इसलिए हो गया लेट


विभागीय जानकारों के अनुसार राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिला शिक्षा केंद्रों को प्रोजेक्ट वर्क और प्रश्नपत्र छपवाने के लिए अपने-अपने जिलों की जिम्मेदारी सौंपी थी। रतलाम में भी यह जिम्मेदारी लेते हुए टेंडर निकाले गए। टेंडर लेने वाली फर्म ने टेंडर तो ले लिया किंतु बाद में जाकर हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में दूसरी बार टेंडर निकालकर यह काम कराना पड़ा जो नौ दिन लेट हो गया।

शिक्षक संघ ने कहा निजी स्कूल क्यों नहीं


मप्र शिक्षक संघ ने पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं सरकारी स्कूलों में कराने और निजी स्कूलों को छूट देने पर सवाल खड़़े किए हैं। संघ के जिलाध्यक्ष सर्वेश कुमार माथुर का कहना है कि निजी स्कूलों के बच्चों को इस दायरे में क्यों नहीं लिया गया। उन्हें भी इस दायरे में लाकर उनकी भी बोर्ड परीक्षा ली जाए।
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सरकार की दोहरी नीति


शासन की दोहरी नीति है कि निजी स्कूलों को इस परीक्षा से वंचित रखा गया है। वैसे भी कोरोना की वजह से साल के ज्यादातर दिनों में स्कूल नहीं लगे। फिर भी शासन बच्चों की बोर्ड परीक्षा लेने पर आमादा है जो गलत है। दिव्यांग शिक्षकों की भी उनके स्कूल से 25-30 किमी दूर ड्यूटी लगाना कहां तक न्यायोचित है।
सर्वेश कुमार माथुर, जिलाध्यक्ष मप्र शिक्षक संघ
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दोबारा टेंडर करना पड़े


जिस फर्म ने पूर्व में डेंटर लिए थे उसने बाद में प्रोजेक्ट के प्रश्नपत्र छापने से मना कर दिया। ताबड़तोड़ नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया करके नई फर्म से ये प्रोजेक्ट छपवाकर वितरित किए हैं। इस वजह से ये देरी से मिले। परीक्षा के दौरान बच्चे ये प्रोजेक्ट वर्क करके शिक्षकों को उपलब्ध करवा सकते हैं।
सीआर टाक, एपीसी जिला शिक्षा केंद्र