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रतलाम. नगर निगम रतलाम का विवादित एजेंडे के बाद शुरू हुआ साधारण सम्मेलन गुरुवार को बजट पेश करने के साथ ही नई राजनीतिक हलचल पैदा कर गया। कांग्रेस और कांग्रेस से निष्कासित खेमे ने एक सुर में कथित विकास के इस बजट को खारिज कर दिया। वहीं, सत्तापक्ष भी विपक्ष के हमलों के बचाव में महज आंकड़ों तक सिमित रहा। सबसे अहम महापौर का बजट भाषण रहा, लेकिन ये भी कोई उम्मीद नहीं जगा सका।
स्वच्छता में पहले से ज्यादा जागरूकता
नगर निगम रतलाम के वित्त वर्ष 2018-19 के बजट को कांग्रेस और विपक्ष में बैठे निष्कासित सहित निर्दलीय पार्षदों ने खारिज कर दिया है। गुरुवार को कार्रवाई की शुरूआत करते हुए महापौर डॉ. सुनीता यार्दे ने कहा कि यह विकास का बजट है और कोई नया कर नहीं लगाया गया है। इस परिषद में शहर की विवादास्पद संपत्तियों का भी निराकरण किया गया है। स्वच्छता रैकिंग में पिछडऩे के बावजूद महापौर ने कहा कि स्वच्छता में पहले से ज्यादा जागरूकता आई है, सभी ने मिलकर बेहतर प्रयास किए। महापौर ने सदन से पेश बजट को सर्वानुमति से पारित कराने का अनुरोध भी किया।
नेता प्रतिपक्ष ने सबसे पहले संभाला मोर्चा
महापौर के स्वागत भाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष यास्मीन शैरानी ने मोर्चा संभाला। शैरानी ने बजट के आंकड़ों पर जाने की बजाय सीधे तौर पर नगर निगम में हुए पीएम आवास घोटाला पर आवाज उठाई। शैरानी ने कहा कि इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की जाना चाहिए। शैरानी ने भाजपा के पार्षदों से भी घोटाले की जांच की मांग के लिए कहा है।
निष्कासित पार्षदों ने भी मिलाया सुर
कांग्रेस से निष्कासित पार्षद मुबारिक खान ने कहा कि उन्होंने अब तक बजट को देखा ही नहीं है, क्योंकि इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो शहर का विकास साबित कर सके। आज 14 साल के बाद ऐसा हुआ है, जब हमने बजट के कागजों को खोलकर भी नहीं देखा। शहर अव्यवस्थाओं से घिरा है, यह बजट तो महज आंकड़ो का खेल नजर आता है। लंच से पहले अन्य पार्षदों ने भी अपनी ओर से सदन के जरिए वार्डो की आवाज उठाई।
Published on:
02 Aug 2018 04:46 pm
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