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आरक्षक बनने के लिए फर्जी मार्कशीट लगाई

कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा

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रतलाम

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Akram Khan

Apr 04, 2018

court news

जावरा। वर्ष २०१२ के एक मामले में फर्जी मार्कशीट पाए जाने पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए विभिन्न धाराओं में अर्थदंड व कारावास की सजा से दंडित किया है। अपर लोक अभियोजक समरथ साहू ने बताया कि प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश राजीव के पाल के न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए सजा से दंडित किया है।

मामले की जानकारी देते हुए साहू ने बताया कि वर्ष २०१२ में मंडला जिले के नारायणगंज तहसील के वीरनलाल मरावी (३३) ने एसएफ में आरक्षक के लिए बटालियन में आवेदन दिया था। इसमें जन्म दिनांक को बदलवाते हुए १०वीं व १२वीं की फर्जी मार्कशीट तैयार करवाकर आवेदन के साथ लगाई गई थी। वीरनलाल की जन्म २२ मई-१९७७ होने के बाद भी उसने इसमें बदलवाकर फर्जी तरीके से २२ मई-१९८३ करवाई थी। यह मामला सामने आने के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल में मार्कशीट को भेजा तो वहां भी यह फर्जी पाई गई थी। न्यायालय में प्रकरण पर विचार और सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को इसमें दोषी पाया और ४६८, ४७१ की धारा में ३-३ साल के कारावास के साथ ५००-५०० रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है तो ४१७ में १ साल की सजा सुनाई है।

कारखाने से सवा लाख चोरी, दो लोगों पर संदेह

रतलाम। शहर के उकाला रोड स्थित एक लोहे की पेटी बनाने के कारखाने में सवा लाख रुपए से अधिक की चोरी का मामला प्रकाश में आया है। पीडि़त ने शिकायत सोमवार को थाने पहुंचकर दर्ज कराई। पीडि़त ने चोरी की शंका उसके यहां काम करने वाले एक व्यक्ति और उसके साथी जताई है, जिन्हें पुलिस हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ कर रही है। कारखाने में चोरी की शिकायत सेठजी का बाजार निवासी इरशाद खिलजी ने की। इसमें बताया कि चोर उसके कारखाने के पीछे का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे और अलमारी का लॉकर तोड़कर उसमें रखे एक लाख ३८ हजार ५०० रुपए से भरा बैग ले गए। पीडि़त के मुताबिक बैग में रुपए के साथ आधार कार्ड, वोटर आई कार्ड सहित कुछ अन्य काम के दस्तावेज भी रखे थे।

इन पर जताई शंका

पीडि़त ने बताया कि उसे उक्त राशि इंदौर के एक व्यापारी को देना थे, जिससे उसने कच्चा माल खरीदा था। पीडि़त ने चोरी की शंका उसके यहां पूर्व में काम करने वाले फिरोज उर्फ कल्लू और उसके साथी कासिम उर्फ दुम्बा पर जताई है। इसके पीछे कारण जब वह रुपए गिनकर अलमारी में रख रहा था, उस दौरान उक्त व्यक्ति उसके यहां आए थे। ये दोनों पूर्व में यहीं काम भी करते थे।