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#Ratlam में कुत्ते अब आवारा नहीं रहे, बल्कि पूरे अधिकारों के साथ स्थायी नागरिक बन चुके

सुबह-सुबह नज़र डालें तो लगेगा मानो जनगणना में इंसानों की गिनती कम और कुत्तों की ज़्यादा हो गई हो।

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Street-Dog

प्रतीकात्मक तस्वीर

रतलाम। रतलाम में कुत्ते अब आवारा नहीं रहे, बल्कि पूरे अधिकारों के साथ स्थायी नागरिक बन चुके हैं। शहर की सड़कों पर अगर सुबह-सुबह नज़र डालें तो लगेगा मानो जनगणना में इंसानों की गिनती कम और कुत्तों की ज़्यादा हो गई हो। गलियां हों, चौराहे हों या मुख्य सड़कें, हर जगह उनका ऐसा आत्मविश्वास कि जैसे नगर निगम की फाइलें वही संभाल रहे हों। रात के समय तो इनका प्रशासन और भी चुस्त-दुरुस्त हो जाता है। पूरी रात ईमानदारी से चौकीदारी करते हैं और जागते रहो… जागते रहो का नारा ऐसे लगाते हैं कि मोहल्ले का हर इंसान जागरण कार्यक्रम में शामिल हो जाए। किसी को अलार्म की ज़रूरत नहीं, कुत्ते समय पर सबको जगा देते है। नींद? वो तो अब रतलाम में विलुप्त होती प्रजाति बन चुकी है।

शहर की मुख्य सड़कों पर इनका दबदबा ऐसा है कि ट्रैफिक नियम भी इन्हें देखकर घबरा जाएं। चौराहे पर बैठकर ऐसे ठसक से रास्ता रोकते हैं, मानो पूछ रहे हों पहले परमिशन ली थी क्या? कोई नया आदमी अगर इनके इलाके में आ जाए तो पूरा पैनल इंटरव्यू चालू हो जाता है। किसके घर जाना है, क्यों आए हो, कितनी देर रुकोगे, और सबसे अहम सवाल पहले कभी यहां आए हो या नहीं? नगर निगम की बात करें तो उन्होंने भी मानो हथियार डाल दिए हैं। कुत्तों की बढ़ती आबादी पर कोई ठोस समाधान नहीं, बस काग़ज़ों में टीकाकरण और नसबंदी के कार्यक्रम चल रहे हैं। कुत्ते भी अब समझदार हो गए हैं। दूर बैठकर पूरा कार्यक्रम देखते हैं और सोचते होंगे, देखो भाई, आज फिर हमारे नाम से फाइल आगे बढ़ गई।

कुत्तों की एकता देखने लायक

इन कुत्तों की एकता देखने लायक होती है। जैसे ही किसी बाइक की आवाज़ आई, पूरी टीम अलर्ट मोड में आ जाती है। बाइक के साथ रेस लगती है, जीतने का जज़्बा इतना ज़्यादा कि हार मानने का सवाल ही नहीं। हर बार बाइक आगे निकल जाती है, ये पीछे रह जाते हैं। फिर भी अगली बाइक के लिए पूरी तैयारी, मानो ओलंपिक की प्रैक्टिस चल रही हो। टीमवर्क तो ऐसा कि कॉरपोरेट टीम भी सीख लें। जब पूरा रतलाम गहरी नींद में जाने वाला होता है या जा चुका होता है, ठीक उसी समय पूरी टीम मिलकर लोगों को जगाने में जुट जाती है। अलग-अलग सुरों में भौंककर ऐसा साउंड सिस्टम बनता है कि किसी भी म्यूजिक आयोजन को मात दे दे।

फिटनेस का राज़ यही

रतलाम के लोग भी अब सेहत के प्रति जागरूक हो चुके हैं। जिम जाना छोड़ दिया है। क्यों जाएं, जब सुबह-सुबह सड़क पर निकलते ही फ्री में कार्डियो, रनिंग और स्प्रिंट सब हो जाता है। कुछ लोग तो कहते हैं कि उनकी फिटनेस का राज़ यही है। सुबह कुत्तों के साथ दौड़ो, शाम को थकान के साथ सो जाओ। नया साल आया है, उम्मीद है कि यह समस्या भी कुछ कम होती दिखाई दे। वरना वो दिन दूर नहीं जब शहर के कुछ इलाकों को बाकायदा कुत्ता राज क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा, और लोग वहां से गुज़रते समय रास्ता नहीं, बल्कि हिम्मत बदलेंगे। फिलहाल तो इतना ही कहा जा सकता है रतलाम में नए साल की शुरुआत कुत्तों के पुराने राज के साथ हुई है।