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Fire NOC: : नगर निगम नहीं कर पाया काम, अब रतलाम कलेक्टर का चलेगा डंडा

बड़े स्कूलों, अस्पतालों और बड़े निजी भवनों में आग बुझाने के उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दो साल पहले से कवायद चल रही किंतु बड़े भवन मालिक हैं कि निगम के कई नोटिस जारी होने के बाद भी आगे नहीं आए हैं।

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बड़े स्कूलों, अस्पतालों और बड़े निजी भवनों में आग बुझाने के उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दो साल पहले से कवायद चल रही किंतु बड़े भवन मालिक हैं कि निगम के कई नोटिस जारी होने के बाद भी आगे नहीं आए हैं।


रतलाम. बड़े स्कूलों, अस्पतालों और बड़े निजी भवनों में आग बुझाने के उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दो साल पहले से कवायद चल रही किंतु बड़े भवन मालिक हैं कि निगम के कई नोटिस जारी होने के बाद भी आगे नहीं आए हैं। हालात यह है कि निगम के सर्वे में सामने आए 89 भवनों में से आधे के पास फायर एनओसी और आग बुझाने के उपकरण नहीं लगाए जा सके हैं। यही नहीं कइयों के पास फायर आडिट और फायर एनओसी तक नहीं है। अब कलेक्टर मिशा सिंह ने इस पर संज्ञान लेते हुए पूरे जिले में ऐसे भवनों पर आग बुझाने के उपकरणों की उपलब्धता करने समितियां बना दी है। ये समितियां ही अब सभी जगह निरीक्षण करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


सीएमएचओ और डीईओ को पत्र भी

नगर निगम ने सीएमएचओ और डीईओ को पत्र लिखकर शहर के सारे अस्पतालों और निजी सहित बड़े सरकारी स्कूलों की सूची ही नहीं इनमें फायर प्लान, फायर ऑडिट और सुरक्षा के उपकरण सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इन दोनों ही विभागों से सूची मिलने के बाद सभी के यहां टीम निरीक्षण करने पहुंचेगी।


100 से ज्यादा को नोटिस

कलेक्टर की तरफ से आदेश मिलने के बाद नगर निगम अमला तुरंत हरकत में आया और अपने पूर्व के सर्वे सहित कुछ और भवनों को जोडक़र 100 से ज्यादा को नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली हैं। सभी संस्थानों से इनके यहां फायर उपकरणों की उपलब्धता, फायर आडिट व फायर एनओसी मांगी जाएगी।

यह है मापदंड
मांगलिक भवन, स्कूल, मॉल या अस्पताल संचालकों को फायर एनओसी लेना अनिवार्य है। मापदंडों के अनुसार 10 मीटर की ऊंचाई, 50 बेड का अस्पताल या 1500 वर्ग मीटर से ज्यादा का एरिया होने पर फायर एनओसी या फायर सिस्टम लगाना जरुरी होता है।

61 ने ली एनओसी

निगम के नोटिसों के बाद मात्र 61 ने ही एनओसी ली है या फायर ऑडिट प्रस्तुत किया है। शेष लोग रुचि ही नहीं ले रहे हैं। राज्य सरकार ने पिछले साल इसमें छूट देते हुए समयावधि दिसंबर तक बढ़ाई थी। इसके बाद भी बचे हुए भवन संचालकों ने कोई रुचि नहीं ली है।

ये समितियां तय करेंगी
- रतलाम शहर में निगम आयुक्त, एसडीएम, एसडीओ ईएंडएम, अग्निशमन अधिकारी, तहसीलदार शहर, बिजली कंपनी के जूनियर इंजीनियर वीबी मरकाम और होमगार्ड की प्लाटून कमांडर ज्योति बघेल समिति में शामिल हैं।
- रतलाम ग्रामीण में ग्रामीण एसडीएम, एसडीओ ईएंडएम, ग्रामीण तहसीलदार, नामली और धामनोद नप के सीएमओ, बिजली कंपनी के सहायक यंत्री किशोर वास्कले, होमगार्ड की प्लाटून कमांडर ज्योति बघेल शामिल किए गए हैं।
- जावरा में एसडीएम जावरा, तहसीलदार जावरा और पिपलौदा, सीएमओ जावरा नपा, सीएमओ बड़ावदा और पिपलौदा, सहायक यंत्री एमयू खान, इएंडएम के उपयंत्री के अलावा होमगार्ड के प्लाटून कमांडर बद्री मंडलोई हैं।
- सैलाना अनुभाग में सैलाना एसडीएम, एसडीओ ईएंडएम, तहसीलदार सैलाना, रावटी व बाजना, सीएमओ सैलाना नप, जेई श्याम रायकवार, उपयंत्री अंतिम वर्मा, होमगार्ड के प्लाटून कमांडर ज्योदि बघेल शामिल किए गए।
- आलोट अनुभाग में आलोट एसडीएम, तहसीलदार आलोट व ताल, सीएमओ ताल व आलोट, जेई अमित पाटीदार, उपयंत्री अंतिम वर्मा और होमगार्ड के प्लाटून कमांडर बद्री मंडलोई को शामिल किया गया है।